फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वच्छता में रैंकिंग चमकाकर बंद कर दी एक करोड़ की मशीन

विज्ञापन
मोरटा कूडा डंपिंग ग्राउंड पर लगी एक करोड़ की मशीन।
विज्ञापन
स्वच्छता में रैंकिंग चमकाकर बंद कर दी एक करोड़ की मशीन
विज्ञापन

गाजियाबाद। नगर निगम ने कूड़े से खाद बनाने के लिए एक करोड़ की मशीन खरीदी, लेकिन सप्ताह भर चलने के बाद ही वह बंद हो गई। स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान इस मशीन को चलाया गया और सर्वेक्षण खत्म होते ही बंद कर दिया गया। अब एक करोड़ की यह मशीन मोरटा स्थित डंपिंग ग्राउंड पर धूल फांक रही है। इससे न खाद बन सकी और न मशीन काम आई।
नगर निगम के पास अगर कचरा निस्तारण करने के इंतजाम हो तो इसके लिए स्वच्छ सर्वेक्षण में अंक दिए जाते हैं। कूड़ा निस्तारण प्लांट न होने की स्थिति में नंबर कट जाते हैं। साल 2020 के स्वच्छ सर्वेक्षण में कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट न होने का खामियाजा नगर निगम को उठाना पड़ा था। स्वच्छ सर्वेक्षण में निगम की रैंक 13 से गिरकर 19 पर पहुंच गई थी। इसके बाद नगर निगम ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 से पहले ही कूड़े से खाद बनाने की मशीन खरीदी। एक करोड़ की यह मशीन मोरटा स्थित डंपिंग ग्राउंड पर लगाई गई थी। इस मशीन से रोजाना 100 मीट्रिक टन कचरे से खाद बनाने का दावा किया गया था। पार्षदों का कहना है कि 100 टन तो दूर यह मशीन 100 किलोग्राम भी खाद नहीं बना पाई। सरकारी फंड का दुरुपयोग कर एक करोड़ रुपये बर्बाद कर दिए गए हैं।
विज्ञापन

बिजली कनेक्शन लिए बिना ही चल गई मशीन
कूड़े से खाद बनाने की यह मशीन बिजली से संचालित होनी थी। नगर निगम ने पिछले साल दिसंबर में ही बिजली कनेक्शन लेने के लिए फाइल चलाने का दावा किया था। कई माह तक यह फाइल एक से दूसरे कार्यालय में भटकती रही। आखिरकार इसके लिए कनेक्शन नहीं मिल पाया। निगम अधिकारियों का दावा है कि जनरेटर लगाकर इस मशीन का संचालन कराया गया है, हालांकि डंपिंग ग्राउंड पर ही तैनात रहने वाले नगर निगम के कर्मचारियों ने इस दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मशीन जनरेटर से ट्रायल के दिन और करीब एक सप्ताह तक जनवरी 2021 में हुए स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान चलाई गई। इसके बाद से यह मशीन बंद है।
5 करोड़ का प्लांट भी नहीं चल पाया, डस्टबिन भी हुए कबाड़
नगर निगम ने 2016-17 में प्रताप विहार में 5 करोड़ की लागत से कूड़े से खाद बनाने का प्लांट लगाया था। कचरा सुखाने के लिए आरसीसी के फाउंडेशन बनाए गए। कूड़ा उठाकर प्लांट तक पहुंचाने के लिए जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली खरीदने के लिए भी फंड दिया गया था। पांच करोड़ का यह प्लांट 5 हजार रुपये की भी खाद नहीं बना पाया। देखरेख के अभाव में यह प्लांट बेकार हो चुका है और सरकार का 5 करोड़ का फंड बर्बाद हो गया। निगम ने घरों में गीला-सूखा कचरा अलग-अलग कराने के लिए करीब 15 लाख के डस्टबिन खरीदकर कबाड़ कर दिए। इन डस्टबिन को घरों में बांटा जाना था, ताकि लोग गीले-सूखे कचरे को अलग एकत्र करने के लिए प्रेरित हो सके।
विज्ञापन

नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर : कूड़े से खाद बनाने के लिए मोरटा में लगाई गई मशीन का संचालन जनरेटर से कराया गया था। अब लैंडफिल साइट को बंद किया जा चुका है। जल्द ही इस मशीन को प्रताप विहार डंपिंग ग्राउंड में शिफ्ट कराया जाएगा। जो संस्था वहां कचरे का निस्तारण करेगी उसे मशीन किराए पर दी जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें