गाजियाबाद की हर सोसायटी के पानी की होगी जांच
गाजियाबाद। जिले की हर आवासीय सोसायटी में अब पानी की जांच होगी। पानी की गुणवत्ता में मिल रही लगातार शिकायतों और लोगों के बीमार पड़ने के बाद यह कदम उठाया गया है। पिछले दिनों एनजीटी और मानव अधिकार आयोग ने डीएम को एक सोसायटी में पानी की गुणवत्ता की शिकायत पर कार्रवाई का आदेश दिया था। अब प्रशासन ने करीब 600 सोसायटी में पानी की जांच का आदेश दिया है। सोसायटी में पीने और एसटीपी के पानी के नमूनों की जांच की जाएगी।
गौरतलब है कि पिछले दिनों एनएच-9 स्थित महागुनपुरम सोसायटी में दूषित पानी पीने से 250 लोगों के बीमार पड़ने के मामले ने तूल पकड़ा था। मामले में सोसायटी के अधिवक्ता विष्णु कुमार गुप्ता की याचिका पर मानवाधिकार आयोग ने डीएम को दोषियों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। मामले में डीएम के आदेश पर गठित पांच सदस्यीय कमेटी में शामिल अपर सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार, जीडीए तहसीलदार दुर्गेश सिंह के साथ प्रदूषण नियंत्रण विभाग, निगर निगम के अधिकारियों ने सोसायटी में दो घंटे जांच की। वहीं, महागुनपुरम सोसायटी के पानी के लिए गए नमूनों की रिपोर्ट तीन दिन में आएगी। शुरूआत में उन सोसायटी में पानी की जांच होगी, जिनकी शिकायत है। ऐसी करीब 40 सोसायटी हैं।
महागुनपुरम में नए एसटीपी का एक सप्ताह में शुरू होगा काम
सोमवार दोपहर सोसायटी पहुंची प्रशासनिक टीम ने महागुनपुरम एओए अध्यक्ष नवीन तोमर के साथ सोसायटी में पुराने और नए एसटीपी की विस्तृत रूप से जांच की। टीम में शामिल प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों को पुराने एसटीपी के संचालन में कई अनियमिताएं मिलीं। दूसरी ओर जीडीए में आदेश के बावजूद नए एसटीपी का चार माह बाद भी काम शुरू न होने पर अपर सिटी मजिस्ट्रेट ने बिल्डर के प्रतिनिधियों से कड़ी नाराजगी जाहिर की। साथ ही बिल्डर को सोसायटी में 500 केएलडी (किलो लीटर पर-डे) की क्षमता का नया एसटीपी प्लांट का काम एक सप्ताह में शुरू कराने के आदेश दिए हैं। साथ ही पुराने एसटीपी को दुरुस्त कराने के आदेश भी दिए गए। साथ ही प्रशासनिक टीम ने एसटीपी संबंधी कार्य की एक सप्ताह बाद मामले की फिर समीक्षा करने की बात कही है।
1750 फ्लैटों में रहते हैं 8000 लोग, 250 हुए थे बीमार
महागुनपुरम सोसायटी में मार्च माह में दूषित पानी के कारण 250 से अधिक लोग बीमार हो गए थे। बीमार होने वालों में अधिकांश बच्चे और बुजुर्ग थे। बीमार पड़ने वालों को पेट दर्द और सिरदर्द की समस्या थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने जांच को कई दिन शिविर लगाया था। सोसायटी में 1750 फ्लैट में 8000 से अधिक लोग रहते हैं। घटना के बाद लोगों ने करीब दो माह तक पानी उबालकर पिया था। घटना के बाद से ही अधिकांश लोग आरओ के पानी व बोतलबंद पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर है।