कॉल सेंटर की आड़ में चला रहे थे ठगी का गिरोह, 5 धरे
गाजियाबाद। कॉल सेंटर की आड़ में चल रहे ठग गैंग का भंडाफोड़ कर साइबर सेल ने सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी लोनी के रहने वाले हैं। कॉल सेंटर राजेंद्र नगर, साहिबाबाद के साहनी टावर में चल रहा था। गीतांजलि विहार रूपनगर निवासी विक्की गुप्ता गैंग का सरगना है, जो पूर्व में पैन कार्ड मुहैया कराने वाली कंपनी में नौकरी करता था और बाद में नौकरी छोड़कर गैंग चलाने लगा। गिरोह पैन कार्ड का डाटा चोरी कर यूपीआई पिन बनाकर ठगी करते थे। वह लोगों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने व लोन दिलाने का झांसा देकर जाल में फंसाते थे।
साइबर सेल केनोडल अधिकारी व सीओ इंदिरापुरम अभय कुमार मिश्र ने बताया कि पिछले कुछ समय से लोन दिलाने व क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने के नाम पर ठगी की शिकायतें बढ़ गई थीं। एक पीड़ित से करीब सवा चार लाख रुपये की ठगी हुई थी। रिपोर्ट दर्ज कर लोनी पुलिस के साथ-साथ साइबर सेल गैंग के खुलासे में लगी थी। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से पता चला कि ठग गैंग राजेंद्र नगर में काम कर रहा था। इसके बाद आरोपियों को ट्रेस कर उन्हें पकड़ लिया गया। आरोपियों में सरगना विक्की गुप्ता के अलावा बंथला कॉलोनी निवासी राकेश, अजय, सागर और गोपाल को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल, 20 डाटा पेपर शीट, तीन एटीएम कार्ड, दो पासबुक, दो चेक, तीन मुहर, 17 अनएक्टिव सिम कार्ड, एक स्कूटी, एक बाइक और 15 हजार रुपये बरामद हुए हैं।
ऐसे करते थे ठगी
सीओ अभय मिश्र ने बताया कि ठग गैंग प्राइवेट कंपनियों से पैनकार्ड धारकों का डाटा लेने के बाद उन्हें बैंककर्मी बनकर फोन करते थे। वह उन्हें क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने और लोन दिलाने का झांसा देते। नाम-पता और जन्मतिथि सही बताने के कारण लोग ठगों के झांसे में आ जाते थे। कार्ड लिमिट बढ़वाने के नाम पर लोगों से कार्ड का नंबर और एक्सपायरी डेट पूछते थे। डिटेल जुटाने के बाद गैंग लोगों के मोबाइल पर एक ओटीपी नंबर भेजता। ओटीपी शेयर करते ही ठग गैंग के सदस्य के मोबाइल यूपीआई खाता बन जाता इस खाते से बैंक की सारी रकम ट्रांसफर कर दी जाती।
दो साल में एक करोड़ से अधिक की ठगी
सीओ ने बताया कि विक्की गुप्ता पूर्व में ठगों को 10 रुपये प्रतिव्यक्ति डाटा उपलब्ध कराता था। बाद में वह खुद गैंग चलाने लगा। विक्की ने पूछताछ में बताया कि वह अब तक चार हजार लोगों का डाटा बेच चुका है। सीओ का कहना है कि गैंग करीब दो साल से सक्रिय है, जो दो साल में सैकड़ों लोगों से एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। गैंग के सदस्यों के 8 बैंक खाते मिले हैं, जिनकी डिटेल मांगने के लिए बैंकों से पत्राचार किया गया है।