डाक विभाग के भर्ती आवेदनों का डाटा लीक, युवक को ठगा
गाजियाबाद। अलग-अलग तरीकों से लोगों को ठगने वाले साइबर जालसाजों ने अब डाक विभाग की भर्ती प्रक्रिया में सेंधमारी की है। करीब ढाई साल पहले निकली ग्रामीण डाक सेवक पद की भर्ती के आवेदकों को चयनित होने का झांसा देकर ठगी की गई है। ऐसा एक मामला गाजियाबाद में भी सामने आया है। जहां दिव्यांग कोटे से आवेदन करने वाले फ्रीलांस अकाउंटेंट से 23 हजार रुपये ठग लिए गए। ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने नंदग्राम थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
नंदग्राम में मेरठ रोड स्थित बनवारी नगर में रहने वाले सचिन का कहना है कि वह फ्रीलांस अकाउंटेंट हैं। करीब ढाई साल पहले डाक विभाग ने ग्रामीण डाक सेवक पद पर भर्तियां निकाली थीं। उन्होंने भी दिव्यांग कोटे से आवेदन किया था। सचिन के मुताबिक, आवेदन करने के बाद उनके पास न तो कोई जवाब आया और न ही वेबसाइट पर कोई रिस्पांस मिला। बीते 22 जून को उनके पास अनजान नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को डाक विभाग से बताया और कहा कि उनके आवेदन की फाइल इंडियन पोस्ट रीकैप डिपार्टमेंट में उसके पास आई है। कॉलर ने बताया कि पात्र अभ्यर्थियों की सूची में उनका भी नाम है। अगर वह सहमत हों तो मेरिट सूची में उनका नाम डाल दिया जाएगा, लेकिन इसके बदले में 20 हजार रुपये देने होंगे। सचिन का कहना है कि वह चयनित होने की खुशी में उन्होंने हां कर दी। तीन बार में 20 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।
डाक विभाग से मिलती-जुलती आईडी बना मेल भी भेजा
सचिन का कहना है कि ठगों के पास उनकी सारी जानकारी थी। उन्होंने उनका पैन नंबर, आधार नंबर बिल्कुल सही बताया। इतना ही नहीं, डाक विभाग की तरफ से उन्हें एक मेल भी भेजी, जिसमें उन्हें चयनित बताया गया। बाद में पता चला कि यह मेल आईडी डाक विभाग की न होकर, उससे मिलती जुलती थी। इसके अलावा ठगों ने उनके मोबाइल पर नामी कंपनियों की तर्ज पर मेसेज भी भेजा।
रकम की मांग जारी रहने पर हुआ शक
सचिन का कहना है कि 20 हजार रुपये लेने के बाद भी ठगों ने उनसे और रकम की मांगी। उन्होंने सिक्योरिटी के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग की। इस पर उन्हें शक हुआ। उन्होंने तीन हजार रुपये भेजकर बाकी रकम ज्वाइनिंग लेटर मिलने के बाद देने की बात कही। सचिन के मुताबिक इसके बाद कोई रिस्पांस नहीं मिला। उन्होंने ठगों के नंबर मिलाए तो वह बंद मिले। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
उधार लेकर दिए थे 23 हजार, मेरे लिए बड़ी रकम
सचिन का कहना है कि वह फ्रीलांस अकाउंटेंट का काम करते हैं। जैसे-तैसे अजीविका चलाते हैं। उनके पास पैसे नहीं थे, लेकिन डाक विभाग में चयनित होने के लालच में उन्होंने जानकारों से उधार लेकर 23 हजार रुपये दे दिए। सचिन का कहना है कि उनके लिए 23 हजार रुपये भी बड़ी रकम है। उन्होंने ठगों को पकड़कर रकम वापस दिलाने की मांग की है।
मेरा डाटा लीक हुआ, गहन जांच हो
सचिन का कहना है कि आवेदन के वक्त उन्होंने अपने दस्तावेज भी सबमिट किए थे। उनका डाटा लीक हो गया, जो बेहद गंभीर मामला है। ठगों ने उनकी तरह न जाने कितने लोगों को शिकार बनाया होगा। कार्यवाहक सीओ द्वितीय महीपाल सिंह का कहना है कि नंदग्राम पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। साइबर ठगों तक पहुंचने के लिए साइबर सेल की मदद भी ली जाएगी। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पता लग सकेगा कि उनके पास आवेदकों का डाटा कहां से आया।