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आंदोलन में युवा पीढ़ी के बीच गंगा-यमुना का संगम

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आंदोलन में युवा पीढ़ी के बीच गंगा-यमुना का संगम
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गाजियाबाद। किसान आंदोलन में अचानक से लौटी ऊर्जा के बीच भाकियू को संजीवनी मिलती दिख रही है। बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के समय से जुड़े किसानों की लड़ाई लड़ती आ रही भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) भविष्य में युवा जोश से भरी दिखाई देगी। या यूं कहें कि बूढ़ी हो चुकी भाकियू को अब अगले आंदोलनों के युवा ध्वजवाहक किसान मिल गए हैं। गाजीपुर बॉर्डर पर युवा पीढ़ी के बीच गंगा-यमुना का संगम भी होता दिखा जा सकता है। राकेश टिकैत के आंसुओं के बाद आंदोलन में लौटे किसानों में युवा की संख्या सबसे ज्यादा है, जिनके मन में भाकियू को लेकर एक नई छाप भी पैदा होती दिखी जा सकती है।
बीते तीन दिनों में बड़ी संख्या में युवा किसान आंदोलन में शामिल हुए है, जिनमें हरियाणा के साथ ही पश्चिमी यूपी में यमुना से सटे बागपत, शामली, मथुरा, सहारनपुर से जुड़े युवा शामिल हैं। साथ ही गंगा और रामगंगा से सटे हापुड़, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, संभल, बुलंदशहर, रामपुर, बदायूं तक के युवा चेहरे आंदोलन में देखने को मिलेंगे। इनमें से काफी युवा ऐसे हैं, जो कहते आ रहे हैं कि उन्होंने लोकसभा और विधानसभा युवाओं में भाजपा को वोट दिया है लेकिन कृषि कानूनों को लेकर सरकार की जिद के चलते वह आंदोलन में शामिल हुए हैं। बृहस्पतिवार की घटना के बाद उन्हें लगता है कि भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार के खिलाफ किसानों की लड़ाई को अब तक सबसे मजबूत तरीके से लड़ा है। 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड के आंदोलन के बाद टूट चुके आंदोलन को उन्होंने सम्मान के साथ पटरी पर लाकर खड़ा कर दिया। अभी तक भाकियू का वर्चस्व पश्चिमी यूपी के चुनिंदा जिलों तक ही मजबूत था। खासकर गंगा के उस पार (मुरादाबाद व बरेली मंडल) भाकियू की उपस्थिति जरूर थी, लेकिन ग्राफ लगातार गिर रहा था, लेकिन अब बड़ी संख्या में गंगा के उस पार के चेहरे आंदोलन में दिखाई दे रहे हैं जो 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठित होने की दिशा में कई राजनीतिक समीकरण खड़े कर सकते हैं। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिति को लेकर भविष्य में कई तरह की राजनीतिक संभावनाएं और उलटफेर होना का संकेत भी देता है, जो पश्चिमी यूपी की करीब 30 सीटों पर समीकरण बदल सकता है। साथ ही प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी भाकियू का वर्चस्व बढ़ने की राह अब आसान होती दिखाई दे रही है।
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भाकियू का ग्रामीण क्षेत्र तक होगा विस्तार
आंदोलन के सहारे अब भाकियू का ग्रामीण क्षेत्र तक विस्तार होगा। ऐसा माना जा रहा है कि आंदोलन में शामिल युवाओं की फौज बड़ी संख्या में भाकियू का दामन थामेंगे। दो महीने के आंदोलन में अभी तक विभिन्न जिलों में 10 हजार से अधिक सदस्य बन चुके हैं लेकिन अब इस संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। ऐसे में युवाओं को जोड़कर भाकियू को किसान राजनीतिक पर अपनी पकड़ को मजबूत करने का रास्ता मिल गया। ग्रामीण क्षेत्र तक युवाओं में पकड़ भाकियू को एक संगठन के लिहाज से मजबूती प्रदान करेगा।
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... तो क्या खिसक सकते हैं युवा मतदाता
आंदोलन के जरिए कई राजनीति समीकरण भी गढ़े जा सकते हैं। खासकर 28 जनवरी की शाम राकेश टिकैत का गांव से पानी मंगाने का भावुक बयान किसान बिरादरी से जुड़े युवाओं के जहन में उतरा गया। इनमें वो युवा सबसे ज्यादा हैं जिन्होंने 2014 व 2019 के लोकसभा और 2017 के विधान सभा चुनाव में भाजपा को वोट दिया था। खासकर जाट बाहुल्य सीटों पर भी बीजेपी सेंधमारी करने में सफल रही थी। लगातार तीनों चुनावों में रालोद का रिजर्व वोट बैंक समझे जाने वाली जाट बिरादरी में मत विभाजन हुआ, जिसका लाभ भाजपा को मिला लेकिन गाजीपुर का आंदोलन विधान सभा चुनाव से पहले कई समीकरणों को बिगड़ सकता है।
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