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किसान कुंभ में बदला यूपी गेट बढ़ता जा रहा लोगों का कारवां

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दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे उपवास पर बैठे किसान। - फोटो : GHAZIABAD City
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किसान कुंभ में बदला यूपी गेट बढ़ता जा रहा लोगों का कारवां
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साहिबाबाद। यूपी गेट बॉर्डर पर चल रहा आंदोलन अब यूपी व उत्तराखंड के किसानों तक सीमित नहीं रहा। आंदोलन से शनिवार को केरल, ओडीसा, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के किसान से जुड़ गए हैं। शनिवार को आंदोलन स्थल पर 15 हजार से अधिक किसान जुटे। यहां पर किसानों का आना रुक नहीं रहा। किसानों के जत्थे के जत्थे बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। आने वाले दिनों में और अधिक किसानों के पहुंचने की उम्मीद है। किसान नेताओं का दावा है कि हजारों की संख्या में आंदोलन स्थल पर किसान चुके हैं। हजारों की संख्या में किसान अभी रास्ते में हैं।
बृहस्पतिवार को यूपी गेट से किसानों को हटाने के लिए जो कुछ हुआ और फिर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के रोने पर किसान भावुक हो उठे। इसके बाद किसान पूरे समर्थन के साथ आंदोलन स्थल की तरफ कूच कर गए। रही सही कसर शुक्रवार को मुजफ्फरनगर में हुई भाकियू की महापंचायत के बाद पूरी हो गई। पंचायत खत्म होने के बाद हजारों की संख्या में किसान यूपी गेट बॉर्डर की तरफ बढ़ने लगे। यही नहीं, देश के अन्य राज्य हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, केरल, ओडीसा से भी किसानों का समर्थन मिलना शुरू हो गया। यहां से भी किसान आंदोलन स्थल पर जुटने लगे है। यही नतीजा रहा कि दो ही दिन में किसानों की संख्या आंदोलन स्थल पर दोगुनी हो गई। शनिवार को 15 हजार से अधिक किसान शाम तक आंदोलन स्थल पर जुट गए। किसानों के जत्थे लगातार यूपी गेट पहुंच रहे है। किसान नेताओं ने दावा किया है कि हरियाणा से पांच हजार ट्रॉलियां आंदोलन के लिए निकल चुकी है। पंजाब की तरफ से भी किसान यहां पर आ रहे हैं। राजस्थान से भी किसानों का यूपी गेट पर आंदोलन से जुड़ना शुरू हो गया है। वहीं, यूपी और उत्तराखंड से तो किसान आ ही रहे हैं। यहां से किसान कम नहीं होंगे लगातार किसानों की संख्या बढ़ेगी।
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यूपी गेट पर 30 लंगर फिर हुए शुरू
बृहस्पतिवार तक कई लंगर बंद हो गए थे। सभी ने अपना सामान समेट लिया था, कुछ लंगर वाले तो लौट गए थे, लेकिन शनिवार को फिर से 30 लंगर शुरू हो गए हैं। जिन लंगरों ने सामान समेट लिया था, वह शुक्रवार को शुरू हो गए थे। सभी लंगर संचालकों ने रोजाना ज्यादा से ज्यादा खाना बनाने के लिए बोला है, जिससे कि आंदोलन में आने वाला कोई भी किसान भूखा नहीं रहे।
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महिलाओं की भी बढ़ी संख्या
पुरुषों के साथ महिलाओं की संख्या भी वृद्धि हो रही है। महिलाएं भी आंदोलन में शामिल होने आ रही हैं। महिलाओं ने मंच के सामने बैठने के साथ ही लंगरों में खाना बनाकर अपनी सेवा देना शुरू कर दिया है। सब्जी काटने से लेकर रोटी बनाने में सेवा दे रही है। महिलाओं ने भी साफ कर दिया है कि अब वह भी घर नहीं लौटेंगी। जब तक आंदोलन चलेगा वह भी यहीं पर रुकेंगी।
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