रैपिड ट्रेन प्रोजेक्ट को भी मिली रफ्तार
गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर में विकास को गति देने और सुगम यातायात व्यवस्था के लिए रैपिड ट्रेन चलाने की दिशा में तेजी से काम जारी है। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए दिल्ली से मेरठ के बीच 82 किमी के रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) पर काम संचालित है और 2032 तक आठ कॉरिडोर बनाए जाने हैं। प्रोजेक्ट को गति देने के लिए आम बजट से शनिवार को 2487 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे प्रोजेक्ट से जुड़े कार्यों को निर्धारित समय सीमा में किया जा सके।
मौजूदा समय में रैपिड ट्रेन के तीन कॉरिडोर पर काम जारी है, जिनमें दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत शामिल है। नियमों के तहत प्रोजेक्ट की लागत का 50 प्रतिशत केंद्र सरकार यानी एनसीआरटीसी देगी और उसके बाद 12.5-12.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और यूपी सरकार को संयुक्त रूप से देनी है। पहली चरण में दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर गाजियाबाद में हाईस्पीड ट्रेन दौड़ेगी। इसके लिए साहिबाबाद से दुहाई के बीच 17 किलोमीटर के दायरे में मार्च 2023 में ट्रैपिड ट्रेन चलाई जानी है, जिसको लेकर तेजी से कम चल रहा है। अब बजट से करीब 2500 करोड़ रुपये दिए जाने से प्रोजेक्ट के काम को रफ्तार मिलेगी और गाजियाबाद में विकास की रफ्तार को भी गति मिलेगी। ध्यान रहे कि यह रूट दिल्ली-मेरठ के बीच तैयार होना है, जिसके पूरी तरह से संचालित होने पर मेरठ से दिल्ली के बीच की दूरी 60 मिनट में तय की जा सकेगी। क्योंकि रैपिड ट्रेन 160 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से दौड़ सकेगी।
- बजट में रैपिड ट्रेन के लिए 2487 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अब राज्य सरकारों को भी अपने स्तर पर बजट जारी करना है, जिसको काम चल रहा है। बजट से धनराशि का प्रावधान किए जाने से साफ है कि सरकार प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के साथ पूरा करना चाहती है। गाजियाबाद के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि सबसे पहले यहीं पर रैपिड ट्रेन संचालित होनी है।
- सुधीर शर्मा, सीपीआरओ, एनसीआरटीसी
- बजट में आम आदमी के लिए खास कुछ नहीं है। कोई बड़ी राहत किसी भी नौकरीपेशा, व्यापारी और उद्यमी को नहीं दी गई है। टैक्स छूट का मामला भी काफी उलझाने वाला है। हां, गाजियाबाद के लिहाज से बात की जाए तो रैपिड ट्रेन प्रोजेक्ट को धनराशि मिली है, जिससे कुछ वर्षों के बाद जिले को नई पहचान मिल सकती है।
- देवब्रत चौधरी, जिलाध्यक्ष राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद