सवा लाख मजदूर लौटे, घूमा उद्योगों का पहिया
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण और पंचायत चुनाव की वजह से अपने घर लौट गए मजदूर वापस आने लगे हैं। जिले में करीब सवा लाख मजदूर लौट आए हैं। इससे उद्योगों का पहिया घूमने लगा है। उत्पादन शुरू हो गया है। हालात सामान्य की तरफ बढ़ रहे हैं। इससे उद्यमियों ने राहत की सांस ली है। उत्पादन करीब 60 प्रतिशत बढ़ गया है। जिले के 27 हजार उद्योगों में करीब साढ़े चार लाख श्रमिक काम करते हैं।
जिला पंचायत चुनाव, कोरोना संक्रमण, कोरोना कर्फ्यू और गेंहू की कटाई के चलते जिले के उद्योगों से पलायन करने वाले श्रमिकों की वापसी हो रही है। जिला उद्योग एवं प्रोत्साहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगभग 1.25 लाख श्रमिक जिले में वापस काम पर लौट आए हैं। कोरोना कर्फ्यू के दौरान जिले के उद्योगों को संचालित कराया गया, जिसके चलते श्रमिकों को वापस काम भी मिला। उद्यमियों के कहना है कि बाजार खुलने और श्रमिकों की वापसी से उद्योगों का पहिया अब तेजी से घूमेगा।
कोरोना की दूसरी लहर और प्रदेश में जिला पंचायत चुनाव की वजह से ज्यादातर श्रमिक अपने घरों को लौट गए थे। इससे उत्पादन यांत्रिकी उत्पादों की करीब 12 हजार इंडस्ट्री में क्षमता से कम श्रमिक रह गए थे। जिस उद्योग में 20 श्रमिक काम कर रहे थे, वहां उनकी संख्या छह से सात रह गई थी। दूसरे उद्योगों में भी श्रमिकों की संख्या घट गई थी।
छोटी इकाईयों में ठप हो गया था उत्पादन
एमएसएमई की छोटी इकाइयों में श्रमिक न होने से उत्पादन ठप हो गया था। खाद्य उत्पादों से जुड़ी 70 इकाइयों में कारीगर और श्रमिक न होने से उत्पादन नहीं हो पा रहा था। जबकि बाजार बंद होने से मशीनरी पार्ट्स की मांग बार से खत्म हो गई थी। बाजार कहके और श्रमिकों की वापसी से इन उद्योगों में उत्पादन 60 फीसदी तक बढ़ गया है।
बाहरी जिलों से लौटे श्रमिकों को भी रोजगार से जोड़ा
जिला उद्योग केंद्र ने हाल ही में 70 ऐसे कुशल श्रमिकों को रोजगार दिलाया है, जो दूसरे जिलों से काम छोड़कर अपने घर वापस लौटे थे। संयुक्त आयुक्त उद्योग बीरेंद्र कुमार ने बताया कि बाहरी जिलों के श्रमिकों के लिए पिछले साल डेस्क तैयार की थी, जो अब भी कार्य कर रही है। इच्छुक श्रमिकों के आने की व्यवस्था कर उनको योग्यतानुसार कार्य से जोड़ा जाता है। बीते साल जिले में बाहरी जिलों से काम छोड़कर 562 श्रमिक लौटे थे, जिसमें से 235 को रोजगार दिलाया गया।
क्या कहते हैं उद्यमी:
श्रमिक न होने से उद्योगों के चलने का लाभ नहीं मिल पा रहा था। श्रमिकों की वापसी हुई है, इससे उत्पादन भी बढ़ गया है। - साकेत अग्रवाल, उद्यमी
खाद्य उत्पादों की इकाईयों में सबसे अधिक परेशानी रही। पैकिंग से लेकर सप्लाई बाधित रही लेकिन अब परिस्थिति बदली है। - अमित जिंदल, उद्यमी