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संकट: सात लाख बच्चों को नहीं मिली दो बूंद जिंदगी की, दूसरे टीके भी नहीं लग पा रहे

Thu, 27 May 2021 01:04 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

वैश्विक महामारी कोरोना की तीसरी लहर से पहले बच्चों के सामान्य टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बच्चों के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नारा दिया था कि एक भी बच्चा छूटा-सुरक्षा चक्र टूटा, लेकिन अब विभाग ही लापरवाही बरत रहा है।
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फाइल फोटो
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण काल में बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण और पोलियो अभियान पूरी तरह से ठप पड़ा है। इस समय सिर्फ कोरोना से बचाव का टीकाकरण युवाओं और बुजुर्गों का हो रहा है। अप्रैल में 7.51 लाख बच्चों के लिए पोलियो से बचाव का दूसरा अभियान चलाया जाना था। यही नहीं विशेष इंद्रधनुष अभियान के तहत 18 हजार गर्भवती एवं लगभग 90 हजार दो साल तक के बच्चों का विशेष नियमित टीकाकरण अभियान भी बंद है। इन बच्चों को टीबी, डायरिया, टिटनेस, खसरा, रुबेला, रोटा वायरस जैसी बीमारियों से बचाव के लिए नियमित रूप से लगने वाले टीके नहीं लग पा रहे हैं।
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वैश्विक महामारी कोरोना की तीसरी लहर से पहले बच्चों के सामान्य टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बच्चों के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नारा दिया था कि एक भी बच्चा छूटा-सुरक्षा चक्र टूटा, लेकिन अब विभाग ही लापरवाही बरत रहा है। बच्चों का टीकाकरण करने के बजाए एएनएम या तो कोरोना से बचाव का वैक्सीनेशन करने में जुटी हैं या तो उन्हें सर्वे के लिए लगा दिया गया है।

कोरोना संदिग्धों की दवाई बांटने और सर्वे में लगी हैं आशा
टीकाकरण शिविर के लिए आशा कार्यकर्ता बच्चों की मां को सूचना देती हैं लेकिन पिछले एक साल से आशा बहुएं कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए घर-घर सर्वेक्षण, संदिग्धों की निगरानी, दवाई वितरण एवं लक्षण वाले मरीजों की सूची बनाने में व्यस्त हैं। उन्हें बच्चों के टीकाकरण के लिए क्षेत्र में भ्रमण का समय ही नहीं मिला।
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इसलिए जरूरी है टीकाकरण
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए।
- पोलियो, खसरा, रोटा वायरस आदि से बचाने को।
- बच्चे को विकास के लिए नए सेल्स के निर्माण के लिए।
- चेचक जैसी महामारी के बचाव को।
- संक्रमण बीमारियों से बचाने को।
- कुपोषण और जानलेवा बीमारियों को रोकने के लिए।
इन बीमारियों से बचाव के लिए लगाए जाते हैं टीके

टीका बीमारी से बचाव
बीसीजी - तपेदिक या टीबी
पेंटावेलेंट - काली खांसी, डिप्थीरिया, टिटनेस, निमोनिया, चिकिनपॉक्स
इंफ्लूएंजा - सर्दी, खांसी, जुकाम
एमएमआर - खसरा, गलसुआ और रूबैला
रोटावायरस - संक्रमण
न्यूमोकोकल - निमोनिया
पोलियो - अपंगता से बचाव
हीमोफिलस बी - हेपेटाइटिस
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डब्ल्यूएचओ के प्रभारी डॉ. अभिषेक सिंह से आज पूरी जानकारी मांगी गई है। कुछ एएनएम कोरोना वैक्सीनेशन में लगी हैं इसलिए फील्ड में टीकाकरण नहीं हो पा रहा है। महिला अस्पताल एवं कुछ केंद्रों पर टीकाकरण चल रहा है। - डॉ. नीरज अग्रवाल, प्रतिरक्षण अधिकारी
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शिशुओं को स्वस्थ एवं बीमारियों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता के लिए टीकाकरण जरूरी है। नियमित टीकाकरण को छोड़ने से नवजात के जीवन पर जानलेवा प्रभाव पड़ सकता है। शिशुओं के जीवन और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी है। - डॉ. विश्रुत सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ
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अधिकांश टीम कोरोना संक्रमण में व्यस्त हैं। कुछ केंद्रों पर टीकाकरण हो रहा है। विशेष अभियान के लिए शासन से गाइडलाइन आती है। उसके बाद अभियान संचालित किया जाता है। इस कोरोना काल में कोई गाइडलाइन नहीं आई है। - डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
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