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मुआवजा घोटाले की जांच में खुला जमीन का 57 साल पुराना फर्जीवाड़ा

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मुआवजा घोटाले की जांच में खुला जमीन का 57 साल पुराना फर्जीवाड़ा
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गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के जमीन अधिग्रहण में किए गए 22 करोड़ के मुआवजा घोटाले की जांच शुरू हुई तो 57 साल पुराने फर्जीवाड़े से पर्दा उठ गया। 1965 में रसूलपुर सिकरोड़ा में ग्राम समाज की 22 बीघा तीन बिस्वा बंजर जमीन को जालसाजी कर अशोक संयुक्त सहकारी समिति के नाम दर्ज किया गया। इसके लिए तत्कालीन प्रधान की तरफ से लाल स्याही से जमीन सीरदार (आवंटी) के नाम दर्ज किए जाने का आदेश लिख दिया गया जबकि प्रधान को आवंटन का अधिकार ही नहीं था। इसी आवंटन के आधार पर समिति ने जमीन बेच डाली। खरीदारों ने अधिग्रहण में देकर करोड़ों का मुआवजा ले लिया। प्रशासन ने इस जमीन को फिर से बंजर में दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
जांच टीम ने फाइलें खंगाली तो 1965 से पहले के रिकॉर्ड में जमीन बंजर में दर्ज मिली। जालसाजी करके इसे दरियागंज दिल्ली रामेश्वर दास ने इसे समिति के नाम दर्ज करा लिया था। बाद में इसका केस भी चला। इसे रामेश्वर हार गए। इसके बाद समिति के पदाधिकारी कहते रहे कि जमीन का आवंटन प्रधान ने किया था लेकिन आवंटन संबंधी कोई दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं मिला। वैसे भी आवंटन कानूनी तौर पर मुमकिन नहीं था, क्योंकि इसकी पात्रता की शर्त यह है कि अगर जमीन सिर्फ उसी गांव के मूल निवासी को आवंटित हो सकती है। अपर उप जिलाधिकारी चंद्रेश सिंह का कहना है कि कोई भी व्यक्ति दूसरे राज्य के गांव आकर बंजर जमीन का पट्टा नहीं ले सकता है। गांव का ही कोई भूमिहीन व्यक्ति जमीन का पट्टा ले सकता है। मिलीभगत से जमीन कब्जाने के लिए फर्जीवाड़ा किया गया।
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चार गांवों की 500 बीघा जमीन पर किया खेल
अशोक गृह निर्माण समिति, अशोक संयुक्त सहकारी खेती समिति के सदस्यों ने जिले के चार गांवों में 500 बीघा से अधिक बंजर जमीन पर फर्जीवाड़ा कर पट्टा दिखाकर खेल किया है। जांच में सामने आया है कि जिले के अर्थला, मटियाला, रसूलपुर सिकरोड़ा, डासना में राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलीभगत का खाते और खतौनी में छेड़छाड़ की।
खारिज किए जाएंगे नाम
अपर उप जिलाधिकारी चंद्रेश कुमार सिंह ने बताया कि रसूलपुर सिकरोड़ा गांव के खसरों की जांच के बाद अशोक संयुक्त सहकारी खेती समिति लिमिटेड, अशोक वाडिया पुत्र किशनलाल निवासी बी-36 मोहन पार्क मेन शाहदरा, दिल्ली, पवन कुमार पुत्र सतपाल निवासी सेकेंड सी नेहरू नगर, सर्वपाल सिंह धल्लीवाल निवासी जोधपुर राजस्थान, हाजी वशीरुद्दीन कल्लूगढ़ी, मोहम्मद शाहिद, निवासी अब्दुल्लागढ़ी मेरठ का नाम खारिज कर पूर्व की भांति बंजर दर्ज कर दिया करने का आदेश दे दिया गया है।
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एसआईटी को दस्तावेज मिलने का इंतजार
22 करोड़ के मुआवजा घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को प्रशासन से दस्तावेज मिलने का इंतजार है। इसके लिए पुलिस की तरफ से पत्र भेजा जा चुका है। दरअसल, अब तक दर्ज चार एफआईआर में प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी भी शक के घेरे में है। इनकी तैनाती के समय में यह घोटाला हुआ। प्रशासन से इनके नाम मांगे गए हैं। इसके बाद ही जांच आगे बढ़ सकेगी।
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