रैपिड रेल प्रोजेक्ट पकड़ेगा रफ्तार, इस साल 1306 करोड़ देगी यूपी सरकार
गाजियाबाद। अगले साल से जिले के लोग रैपिड रेल में सफर कर सकेंगे। प्रदेश की योगी सरकार 2.0 ने बृहस्पतिवार को पेश किए गए बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए 1306 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इससे दिल्ली से मेरठ के बीच बन रहे रैपिड रेल कॉरिडोर का निर्माण अब और रफ्तार पकड़ेगा। 82 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का 17 किलोमीटर लंबा प्राथमिकता वाले साहिबाबाद से दुहाई तक के हिस्से पर 2023 तक रैपिड रेल चलाने का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
देश की पहली रीजनल रैपिड रेल प्रोजेक्ट पर करीब 40 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रोजेक्ट में 50 फीसदी अंशदान भारत सरकार, 12.5 फीसदी अंशदान उत्तर प्रदेश सरकार, 12.5 फीसदी अंशदान हरियाणा सरकार और 12.5 फीसदी अंशदान राजस्थान सरकार का है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में भी प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 1326 करोड़ रुपये जारी किए थे। रैपिड रेल के इस पहले सेक्शन में गुलधर के पास वेयरहाउस हब और दुहाई के पास कामर्शियल ऑफिस हब बनाया जाना प्रस्तावित है। यह प्रोजेक्ट 2025 तक पूरा होना है, लेकिन केंद्र सरकार अब साहिबाबाद से दुहाई के बीच 2023 में रैपिड रेल का संचालन शुरू करने की तैयारी कर रही है। बृहस्पतिवार को यूपी विधानसभा में पेश हुए आम बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए 1306 करोड़ रुपये आवंटित कर सरकार ने तय कर लिया है कि इस प्रोजेक्ट के प्राथमिकता वाले हिस्से को समय से पूरा कराया जाएगा।
रैपिड रेल में मिलेंगी सुविधाएं:
- कोच में यात्रियों के खड़े होने व सामान रखने पर्याप्त जगह होगी, होंगी रैक
- हर सीट पर मोबाइल व लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट और वाई-फाई की सुविधा
- दिव्यांगों के लिए दरवाजों के पास व्हीलचेयर की जगह व स्ट्रेचर ले जाने का प्रावधान
- कोट टांगने के लिए हुक, मैगजीन होल्डर भी होगा
- बाहर रोशनी के अनुसार केबिन में खुद नियंत्रित होगी प्रकाश की व्यवस्था
- ब्रेकिंग सिस्टम के जरिये पैदा होने वाली ऊर्जा का होगा इस्तेमाल
- ट्रेन में स्वचालित ट्रेन संचालन प्रणाली का होगा इस्तेमाल
- प्रीमियम कोच में सीट को फैलाने (रिक्लाइन) की सुविधा, सीटों में भी होंगे हैंडल
- अधिकतम 180 किमी प्रति घंटा की रफ्तार होगी।
सेफ सिटी और राज्य स्मार्ट सिटी मिशन में गाजियाबाद के हाथ खाली
राज्य स्मार्ट सिटी मिशन और सेफ सिटी के लिए गाजियाबाद को बजट नहीं मिला है। बीते साल सरकार की ओर से गाजियाबाद को सेफ सिटी के रूप में चुना गया था। इस मद में गाजियाबाद को सिर्फ चार करोड़ रुपये ही मिले हैं। अभी न तो शहर में पिंक टॉयलेट्स बने हैं और न ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। 2022-23 के आम बजट में लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, आगरा, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज को सेफ सिटी बनाने के लिए बजट मिला है, लेकिन गाजियाबाद के हाथ खाली रहे।