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फूलों की खेती से महकेगा जिला, बनेंगे फूलों के क्लस्टर

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फूलों की खेती से महकेगा जिला, बनेंगे फूलों के क्लस्टर
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गाजियाबाद। फूलों की खेती करने वाले किसानों का क्लस्टर बनाया जाएगा। इसके लिए शासन ने फूलों की खेती करने वाले किसानों की रिपोर्ट मांगी है। जिले में कहां-कहां और कितने हेक्टेयर में फूलों की खेती करते हैं, उन किसानों की रिपोर्ट शासन को उद्यान विभाग ने भेज दी है। क्लस्टर बन जाने के बाद फूलों से बनने वाले उत्पादों के प्लांट लगाए जाने की योजना है।
जिले में मुकीमपुर गांव में 100 से अधिक किसान गुलाब के फूलों की खेती करते हैं। लगभग 150 हेक्टेयर में सिर्फ फूलों के गुलाब की ही खेती होती है। पिछले दो मौसम में किसानों की फसल का काफी नुकसान हुआ है और उनको फसल का सही रेट भी नहीं मिल पाया है। इन किसानों का क्लस्टर बनाकर समूह में सभी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा जिले में रजनीगंधा, गेंदा, जरबेरा आदि फूलों की खेती होती है लेकिन यह खेती काफी छोटे स्तर पर की जाती है। मुरादनगर, डासना और पिलखुआ के आसपास कुछ किसान पॉली हाउस में फूलों की खेती करते हैं, जो महज दो से पांच हेक्टेयर जमीन पर होती है।
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कन्नौज के व्यापारी एसेंस बनाकर ले जाते हैं बाहर
मुकीमपुर गांव में हर बार कन्नौज से एक व्यापारियों की टीम आती है, जो इत्र और एसेंस के लिए किसानों से फूल खरीदती है। वह किसानों से 15-18 रुपये किलो फूल खरीदते हैं और यहां से लेकर जाते हैं। क्लस्टर बनने के बाद इसी क्षेत्र में उद्यान विभाग की तरफ से गुलाब जल और इत्र बनाने का प्लांट लगवाने की योजना है। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग विभाग द्वारा ही गुलकंद तैयार करने की योजना है।
जिला उद्यान अधिकारी निधि ने बताया कि गुलाब की खेती करने वाले किसानों का एक एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन) या क्लस्टर बनाया जाएगा। शासन ने सभी फूलों की खेती करने वाले किसानों की रिपोर्ट भेज दी गई है, लेकिन गुलाब की खेती अधिक होने से, खेती वाले गांव में ही कलस्टर बनाए जाने की संभावना है। इत्र बनाने का प्लांट लग जाने से किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलेगा। इसके अलावा अन्य सुविधाएं भी मिलेगी।
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मुकीमपुर में गुलाब की खेती करने वाले किसान सुधीर तोमर ने बताया कि एक एकड़ से अधिक जगह पर गुलाब की खेती करता हूं। पिछले दो साल कोरोना के दौरान गुलाब की खेती में काफी घाटा हुआ है अगर क्लस्टर बन जाए तो कुछ फायदा हो। फिलहाल तो किसानों को मुफ्त बिजली भी नहीं मिल रही है। यूरिया खाद सभी महंगे हो गए हैं। खेती महंगी हो गई ऊपर से फसल का उचित मुनाफा नहीं मिल पा रहा है।
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