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650 करोड़ के फर्जी लेनदेन में 125 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी

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650 करोड़ के फर्जी लेनदेन में 125 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी
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गाजियाबाद। वाणिज्य कर विभाग ने लोहे के 43 फर्मों द्वारा 650 करोड़ का फर्जी लेनदेन पकड़ा है। फर्मों ने 128 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की है। टैक्स चोरी शनिवार को गाजियाबाद, गौतमबुद्घनगर, दादरी, सिकंदराबाद, बुलंदशहर, हापुड़, खुर्जा में विभाग की 23 टीमें द्वारा छापा मारने के बाद पकड़ में आई। छापा की कार्रवाई सुबह दस बजे से लेकर देर रात तक चलती रही। अधिकारियों का कहना है कि शासन के निर्देश पर फर्मों को चिन्हित किया गया था।
गाजियाबाद-नोएडा जोन की अपर आयुक्त अदिति सिंह ने बताया कि फर्मों द्वारा चेन बनाकर लगभग 650 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार दिखाया। इसके माध्यम से फर्मों ने 128 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की। जांच में सामने आया है कि कुछ फर्मों ने ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीयन लिया है और केवल ई-वे बिल बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया है। इन व्यापारियों के खिलाफ विभाग एफआईआर दर्ज कराएगा।
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गाजियाबाद की 15 फर्मों पर जांच
अभियान के दौरान गाजियाबाद की 15 फर्मों की जांच अधिकारियों ने की। इनमें परम एंटरप्राइजेज हिंडन विहार, एमएस एंटरप्राइजेज मेरठ रोड, खेकड़ा स्टील्स हिंडन विहार, श्री अरिहंत एंटरप्राइजेज पांडवनगर, शिवाय रिसाइकलिंग सॉल्यूशंस स्वर्णजयंतीपुरम, श्री बालाजी ट्रेडर्स विकासनगर मेरठ रोड, शालीमार आयरन स्टील शालीमार गार्डन, आयुष ट्रेडर्स अमृत कंपाउंड, प्रमोद ट्रेडर्स बीएसआर औद्योगिक क्षेत्र, प्रदीप ट्रेडर्स शालीमार गार्डन, श्री पदमप्रभु स्टील लोहा मंडी, तिरुपति ट्रेडर्स छोटा कैला स्क्रैप बाजार, जीएम ट्रेडर्स जस्सीपुरा, आर्यन ट्रेडर्स खोड़ा, राज राजेश्वरी ट्रेडर्स लोहा मंडी शामिल हैं।
कहीं मिला प्रॉपर्टी डीलर का ऑफिस, कहीं सिर्फ बोर्ड
अधिकारियों की टीम जब जांच के लिए फर्म के पतों पर पहुंची तो कहीं एक दुकान में प्रॉपर्टी डीलर का ऑफिस मिला तो किसी दीवार पर केवल बोर्ड लगा हुआ था। मेरठ रोड पर एमएस एंटरप्राइजेज फर्म के नाम ऐसा देखने को मिला। अन्य जिलों और शहरों में भी ऐसी स्थिति रहने से इनके संचालक पकड़ में नहीं आ सके।
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ऐसे करते हैं खेल
खरीद पर लगने वाले टैक्स की धनराशि ही आईटीसी होती है। फर्जी फर्म अधिकांश बिल-पर्चे पर लेनदेन करती हैं। बिना वास्तविक माल की बिक्री के अर्जित आईटीसी का या तो रिफंड क्लेम करती हैं या फिर टैक्स में समायोजित कर देती हैं। जांच में सामने आया है कि टैक्स चोर एक गिरोह के तौर पर काम कर रहे हैं। कई फर्म मिलकर लेनदेन करती हैं और बड़ी चेन बना लेती हैं, जिससे टैक्स चोरी को आसानी से न पकड़ा जा सके। कुछ समय के बाद इस तरह की फर्म बंद हो जाती हैं।
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