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ग्रामीण वार्डों में रहने वाले लोगों को एक अप्रैल से देना पड़ेगा हाउस टैक्स

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ग्रामीण वार्डों में रहने वाले लोगों को एक अप्रैल से देना पड़ेगा हाउस टैक्स
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गाजियाबाद। ग्रामीण वार्डों में रहने वाले भवन मालिकों को भी अब हाउस टैक्स अनिवार्य रूप से देना होगा। एक अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष में नगर निगम इन्हें टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी कर रहा है। जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफॉरमेशन सिस्टम) सर्वे के बाद अब इन ग्रामीण वार्डों में भौतिक सर्वे 31 मार्च तक पूरा हो जाएगा। एक अप्रैल से ग्रामीण वार्डों के भवनों को टैक्स बिल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
हाउस टैक्स से छूटे भवनों को कर के दायरे में लाने के लिए कराया जा रहा जीआईएस सर्वे अब अंतिम चरण में है। 95 फीसदी क्षेत्र में सर्वे पूरा हो चुका है। पांच वार्डों में यह काम अंतिम चरण में है। इस सर्वे के दौरान करीब 1.5 लाख नए भवन टैक्स के दायरे में लाए गए हैं। इनमें ग्रामीण वार्डों के भवन और बीते चार-पांच साल में बनकर तैयार हुई रिहाइशी इमारतों के भवन शामिल हैं। ग्रामीण वार्डों में नगर निगम सफाई, सड़क, सीवर, नाला निर्माण, स्ट्रीट लाइट आदि की सुविधाएं तो देता है, लेकिन इन क्षेत्रों से निगम को टैक्स नहीं मिलता। यही वजह है कि निगम का खर्च तो लगातार बढ़ रहा है, लेकिन आमदनी में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। आमदनी के स्रोत बढ़ाने के लिए नगर निगम अब छूटे भवनों के साथ-साथ ग्रामीण वार्डों पर भी टैक्स लगाएगा। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया कि अप्रैल में इन भवनों को टैक्स के बिल भेजे जाएंगे।
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इन क्षेत्रों में लगेगा हाउस टैक्स
दुहाई, मोरटा, सदरपुर, गुलधर, नायफल, बयाना, महरौली, बम्हेटा, मकनपुर, मिर्जापुर, अकबरपुर, बहरामपुर, सैन विहार, शांति नगर, क्रॉसिंग सिटी, नूरनगर, सिहानी, पसौंडा, चिकंबरपुर, करहेड़ा, कडकड़ मॉडल, महाराजपुर आदि।
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टैक्स के रेट हो सकते हैं अलग
नगर निगम ग्रामीण वार्डों में टैक्स के रेट अलग रख सकता है। हालांकि अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद इस पर निर्णय लिया जा सकता है। इसकी एक वजह यह भी है कि गांव में लोगों के घरों का क्षेत्रफल ज्यादा होता है और उसमें खाली एरिया अधिक रहता है। ऐसे में गांवों के वार्डों के लिए अलग रेट तय हो सकते हैं।
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इनसेट: दोगुना टैक्स के भेजे जा रहे बिल, फरियादी परेशान
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