घर पहुंचा लाल तो परिजन हुए निहाल
गाजियाबाद। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए स्वर्णजयंतीपुरम निवासी देवेश कौशिक रविवार दोपहर अपने घर पहुंच गए। उन्हें प्रशासन के अधिकारी गाड़ी से घर छोड़ने पहुंचे। अपने लाल को देखकर माता पिता की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। मां ने बेटे की आरती उतार गले से लगा लिया। रिश्तेदारों ने भी फोन कर हालचाल जाना।
देवेश भी अपनों के बीच पहुंचकर काफी खुश हैं, उन्होंने भारत सरकार का आभार जताया है। देवेश ने बताया कि पिछले साल नवंबर में उजगोरोड नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में दाखिला लिया था। वह प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वहां माहौल तनावपूर्ण है। हालात ठीक नहीं हैं, लेकिन जिस शहर में वह रहे थे वहां स्थिति अभी सामान्य है। वह स्वीतनोक हास्टल में रहते थे, उनके साथ हॉस्टल में करीब 400 छात्र हैं, जिसमें से करीब साढ़े तीन सौ छात्र भारतीय हैं। बाकी नाइजीरियन हैं।
देवेश ने बताया कि उजगोरोड से हंगरी बॉर्डर मात्र 15 किलामीटर दूर है। युद्ध शुरू होने के बाद लोग डरे हुए हैं। भारतीय छात्रों को हंगरी बॉर्डर के रास्ते वहां की राजधानी बुदापेस्ट लाया जा रहा है। यहां से फ्लाइट से भारत लाया जा रहा है। उनके साथ फ्लाइट में उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिले के 37 छात्र आए हैं।
यूपी भवन में गुलाब से हुआ स्वागत
सुबह नौ बजकर 15 मिनट पर फ्लाइट इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची। यहां से उन्हें यूपी भवन ले जाया गया। छात्रों को गुलाब का फूल देकर स्वागत किया गया। यूपी भवन ले जाकर नाश्ता और भोजन कराया गया। यहां से गाजियाबाद प्रशासन की गाड़ी उन्हें घर तक लाई। करीब सवा दो बजे वह घर पहुंचे।
मां हर्षिता बोलीं, तीन दिनों से नहीं आई नींद
देवेश की मां हर्षिता कौशिक ने कहा कि तीन दिनों से हम लोग ठीक से सो नहीं सके हैं। बेटे को देखकर जान में जान आई है। कई दिनों बाद आज बेटे की पसंद का खाना बनेगा। पिता नवनीत कौशिक ने कहा कि हम उन छात्रों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, जो वहां फंसे हैं। भारत सरकार से अपील है कि हमारे सभी छात्रों को सकुशल घर लाया जाए।