करोड़ों ठगने वाले एसीबी के फर्जी अधिकारी व लोकपाल गिरफ्तार
गाजियाबाद। साइबर सेल व कविनगर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो), आईआरडीए (बिमा विनियामक और विकास प्राधिकरण) के फर्जी अधिकारी व लोकपाल बनकर करोड़ों की ठगी कर चुका है। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्य नवीन निवासी जैतपुर एक्सटेंशन बदरपुर दिल्ली व पुनीत सिंह तोमर निवासी दलायपुर उत्तरी पूर्वी दिल्ली को गिरफ्तार किया है। एसपी सिटी प्रथम निपुण अग्रवाल ने बताया कि गिरोह ने देशभर के सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की है। आरोपियों से 10 मोबाइल फोन, आधार, वोटिंग व एटीएम कार्ड, डाटा पेपर सीट, आईआरडीए के लैटर और एसबीआई के गारंटी लैटर की फोटो कॉपी बरामद हुई है।
एसपी सिटी ने बताया कि गिरोह के सदस्य उन लोगों को अपना शिकार बनाते थे, जो पहले ही ठगी के शिकार होते था या जिनकी बीमा पॉलिसी लैप्स हो जाती थी। आरोपी आईआरडीए व एसीबी के फर्जी अधिकारी व लोकपाल बनकर पॉलिसी दोबारा शुरू कराने व मेच्योरिटी दोगुनी कराने का लालच देकर लोगों को झांसे में लेते थे। इसके एवज में आरोपी लोगों ने किश्त के नाम पर लाखों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। जिन खातों में रकम मंगाई जाती थी, वह भोले-भाले व गरीब लोगों के होते थे। जिन्हें एकमुश्त रकम देकर वह उनके खातों का इस्तेमाल करते थे। ऐसे कई खाताधारक ट्रेस कर लिए गए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। एसपी सिटी प्रथम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी निवासी नवीन और पुनीत सिंह तोमर मुंबई निवासी संतोष व विवेक नामक व्यक्ति से 60 लाख रुपए ठग चुके हैं। इस मामले में मुंबई के चंद्रपुर जिले की पुलिस दोनों को तलाश रही थी। इसके अलावा आरोपियों ने देश के हजारों लोगों से करोड़ों रुपये ठगे जाने की बात कबूली है।
मुंबई पुलिस ने मांगी थी गाजियाबाद पुलिस से मदद
सीओ कविनगर व साइबर सेल के नोडल अधिकारी अभय कुमार मिश्र ने बताया कि मुंबई से ठगी गई रकम को आरोपियों ने जिन खातों में ट्रांसफर कराया, वह गाजियाबाद के थे। इसके बाद मुंबई पुलिस ने गाजियाबाद पुलिस से मदद मांगी थी। मुंबई पुलिस के इनपुट के बाद साइबर सेल व कविनगर पुलिस को अलर्ट कर दिया गया। आरोपियों के मोबाइल नंबर ट्रेस करने के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।
नाम व पद बदलकर कॉल करते थे आरोपी
सीओ कविनगर ने बताया कि आरोपियों ने इंश्योरेंस कंपनियों से उन लोगों का डाटा इकट्ठा किया, जिनकी पॉलिसी लैप्स हो गई थी। इसके बाद गैंग के सदस्य डूबा हुआ पैसा वापस दिलाने के लिए लोगों को कॉल करते थे। कभी खुद को एंटी करप्शन ब्यूरो तो कभी आईआरडीए का अधिकारी बताते तो कभी खुद को लोकपाल बताते थे। पैसा वापस कराने के लिए वह एक प्रार्थना-पत्र भी मांगते थे। आरोपियों के पास से आईआरडीए के ज्वाइंट डायरेक्टर का फर्जी आईडी कार्ड भी बरामद हुआ है।
हर सप्ताह करते थे सैर-सपाटा
पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम को आरोपी अपने शौक पूरा करने में खर्च करते थे। महंगा गाड़ियों में घूमना व महंगे कपड़े और जूते खरीदा व सैर-सपाटा करना गिरोह के सदस्यों की आदत में शुमार था। गिरोह के सदस्य हर सप्ताह शनिवार व रविवार को कुल्लू-मनाली घूमने जाते थे। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल में कई लोगों से चैटिंग भी मिली है, जिन्हें वह ठगने वाले थे।