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बजट से किसानों पर बढ़ेगा कर्ज, जमीन छीनने का षड्यंत्र : राकेश टिकैत

Tue, 02 Feb 2021 05:01 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, साहिबाबाद
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किसान नेता राकेश टिकैत - फोटो : पीटीआई
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केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश 2021-22 वित्तीय वर्ष के बजट को भाकियू नेता राकेश टिकैत ने किसानों की जेब पर कर्जा बढ़ाने वाला बताया। कहा, बजट में किसानों की फसलों के भाव पर कोई बात नहीं हुई, लेकिन कर्जा बढ़ाने का प्रावधान जरूर किया गया है।

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टिकैत ने कहा कि यह जमीन छीनने का बहुत बड़ा षड्यंत्र है। यदि किसानों को फसल का सही भाव मिलता तो गुजारा चल जाता। राकेश टिकैत ने यूपी गेट पर आंदोलन स्थल के मंच से किसानों को संबोधित करते हुए इस बजट को व्यापारी और कारपोरेट का हित वाला बताया।

सरकार द्वारा संसद में लाए गए बजट को देखने के लिए यूपी गेट पर आंदोलन में शामिल किसान दोपहर बाद भी टीवी और एलईडी को तलाशते हुए नजर आए। लेकिन किसानों की ट्रैक्टर ट्रॉली में कहीं भी इसकी व्यवस्था नहीं थी। जबकि केंद्र सरकार के निर्देश के तहत गाजीपुर यूपी बॉर्डर पर इंटरनेट सेवा भी बंद थी। लिहाजा सैकड़ों किसान मोबाइल पर भी बजट का भाषण नहीं सुन सके।
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वहीं, आंदोलन स्थल के मंच से किसानों को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों को फसल का भाव तो मिलेगा नहीं, लेकिन कर्जा जरूर बढ़ेगा। यह जमीन छीनने का बहुत बड़ा षड्यंत्र है।

इसके बाद उन्होंने कहा कि यह बड़ा टारगेट है जिसमें लोगों की जमीन 10 या 15 साल में व्यापारियों व कारपोरेट के पास चली जाएगी। फिर इसे कर्जा मुक्त अभियान बताकर लोगों का शोषण किया जाएगा। इसी तरह डीजल पर भी चार प्रतिशत टैक्स बढ़ा दिया है।

नहीं बताया आमदनी दोगुनी करने का फार्मूला
सरकार ने बजट में भी एमएसपी पर उत्पादन लागत 1.5 बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इस पर राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार बजट में डेढ़ गुना उत्पादन लागत बढ़ाने की बात कह रही है, लेकिन फॉर्मूला बताने को तैयार नहीं है। सरकार एमएसपी पर गारंटी बनाकर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू कर दे। फसल की खरीद सरकार को नहीं, व्यापारियों को करनी है।

एमएसपी की खरीद पर गारंटी मिलते ही व्यापारियों को इन्हें भी सही दाम में खरीदना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को बजट से काफी उम्मीद थी। जिसमें उप्र के किसानों को भी अन्य राज्यों के किसानों की तरह बिजली बिल माफ, कृषि उपकरणों पर टैक्स में छूट व सब्सिडी मिलना व छोटे किसानों के खाते में छह हजार मदद को बढ़ाकर अन्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी। मगर इस तरह की कोई भी राहत किसानों को बजट में नहीं मिली।

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