दोहरे हत्याकांड के दो आरोपी मुठभेड़ में ढेर
गाजियाबाद। वेव सिटी में 20 अप्रैल की रात रंजिश में की गई युवक हरेंद्र और जितेंद्र की हत्या में फरार चल रहे अपराधी बिल्लू गैंगस्टर (35) और राकेश (35) शनिवार तड़के चार बजे पुलिस की गोली लगने से मारे गए। बिल्लू पर एक लाख और राकेश पर 50 हजार का इनाम था। पुलिस का दावा है कि बिल्लू के साथ इंदिरापुरम के कनावनी में मुठभेड़ में हुई जिसमें दो पुलिसवाले घायल हुए। राकेश मधुबन बापूधाम के बुनकर चौराहे के पास जवाबी फायरिंग में ढेर हो गया। इस मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी घायल हुआ। दोनों मुठभेड़ में पुलिस एक-एक बदमाश भाग निकलने में कामयाब रहा।
शुक्रवार को ही पूर्णकालिक एसएसपी नियुक्त किए गए मुनिराज जी. ने मुठभेड़ के बारे में मीडियाकर्मियों को बताया, बिल्लू और राकेश के शहर में आने की सूचना पर चेकिंग कराई जा रही थी। एसपी क्राइम डॉ. दीक्षा शर्मा और एसपी सिटी निपुण अग्रवाल की टीम का आमना-सामना बिल्लू गैंगस्टर और उसके साथी से हो गया। बदमाश भागने लगे। उनकी बाइक पुस्ता बैराज के पास कंटीले तारों में फंसकर गिर गई। बदमाशों ने 10 राउंड फायरिंग की। पुलिस ने जवाब में पांच गोलियां चलाईं। बिल्लू गोली लगने से घायल हो गया। उसका साथी भाग निकला। घायल को अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने मृत बताया। बदमाशों की गोली से क्राइम ब्रांच प्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दीकी और कांस्टेबल संदीप घायल हो गए।
दूसरी मुठभेड़ में पुलिस टीम का सामना बुनकर चौराहे पर राकेश और उसके साथी से हुआ। दोनों बाइक पर थे। उन्होंने भी दस राउंड फायरिंग की। पुलिस ने यहां भी पांच गोलियां चलाईं। राकेश को गोलियां लगीं। उसे डॉक्टर ने मृत बताया। बदमाशों की गोली लगने से सिपाही नीरज घायल हुआ। उधर, स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि पुलिस की गोलियां बदमाशों के शरीर के ऊपरी हिस्से में लगीं।
लूट, हत्या और डकैती के मुकदमे
मुठभेड़ में मारे गए दोनों अपराधी नोएडा में बादलपुर थाना क्षेत्र के दुजाना गांव के थे। बिल्लू के खिलाफ पहला केस 2015 में दर्ज हुआ था। उस पर लूट, हत्या, डकैती, हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के केस दर्ज हैं। राकेश पर लूट, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट सहित 15 केस दर्ज हैं। 20 अप्रैल को हुए दोहरे हत्याकांड में दोनों का नाम आया था। तभी से पुलिस को उनकी तलाश थी।
दोहरे हत्याकांड से मुठभेड़ तक
20 अप्रैल को वेव सिटी में दुजाना गांव के ही हरेंद्र और जितेंद्र की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। खुलासा हुआ था कि हत्या बिल्लू गैंगस्टर और उसके गिरोह के साथियों ने की है। पांच साल पहले बिल्लू के भाई अनिल की हत्या हुई थी। उसे शक था कि अनिल की हत्या जितेंद्र और हरेंद्र ने की है। इसी शक में उसने दोनों की हत्या करने की साजिश रची थी। साजिश के तहत गांव के ही अनिल से जितेंद्र और हरेंद्र को वेव सिटी बुलवाया था। दोनों को लाने के बदले बिल्लू गैंगस्टर ने विनोद को दो लाख रुपये दिए थे। दोहरे हत्याकांड में चार के नाम सामने आएए बिल्लू, राकेश, अनिल और विनोद। अनिल आठ मई को पकड़ा जा चुका जबकि विनोद फरार चल रहा है।
पुलिस की कहानी पर उठ रहे सवाल
गाजियाबाद। पुलिस ने मुठभेड़ की जो कहानी बताई है, वह आसानी से किसी के गले नहीं उतरने वाली नहीं है। इस पर कई सवाल उठ रहे हैं। पहला सवाल यह है कि इस बार पुलिस की गोली बदमाशों के शरीर के ऊपरी हिस्से में कैसे लगीं, जबकि पिछले तीन महीने में हो चुकीं 50 से ज्यादा मुठभेड़ में हर बार बदमाशों के पैर ही निशाना बने। पुलिस ने बताया है कि दोनों मुठभेड़ में बदमाशों ने 10-10 गोलियां ही चलाईं। पुलिस ने भी दोनों जगह एकदम बराबर पांच-पांच गोलियां चलाईं। अफसरों का कहना है कि बदमाशों के आने की एकदम पक्की खबर मिली थी। सवाल यह है कि इतनी पक्की खबर पर की गई घेराबंदी के बावजूद दोनों मुठभेड़ में एक-एक बदमाश कैसे भाग निकला। सवाल यह है कि पुलिस की गोली सिर्फ इनामी अपराधी को ही क्यों लगी, उनके फरार हुए साथी निशाने से कैसे बच गए।
रात में शव ले गए परिजन
मुठभेड़ में मारे गए बिल्लू और राकेश के परिजनों को पुलिस ने फोन से सूचना दी। दोनों के परिजन देर शाम मोर्चरी में पहुंचे जहां पोस्टमार्टम के बाद रात में शव लेकर गांव चले गए।