एक्सप्रेसवे पर पलटी वैन में लगी आग पिछली सीट पर फंसे दो लोग जिंदा जले
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर मसूरी के पास नूरपुर क्षेत्र में बुधवार शाम करीब चार बजे स्कूटी को बचाने की कोशिश में पलटी ओमनी वैन में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में चंद्रप्रकाश (25) और सविता (22) चीख-पुकार के बीच जिंदा जल गए। दोनों सबसे पीछे की सीट पर थे और इसका गेट खुल नहीं पाया। अगली और बीच की सीट पर सवार दो-दो लोगों ने गेट से कूदकर जान बचाई। इस दौरान तीन बुरी तरह झुलस गए।
हरिद्वार जनपद के निवासी ये सभी लोग आपस में रिश्तेदार हैं। हरिद्वार से वैन में सवार हुए थे और नागपुर जा रहे थे। दिल्ली पहुंचकर उनको ट्रेन पकड़नी थी। वैन को अवधेश चला रहे थे। ड्राइवर के पास वाली सीट पर शिवम बैठे थे। इसके पीछे बीच वाली सीट पर अनुज और निशा थे। चंद्रप्रकाश और सविता सबसे पीछे वाली सीट पर थे। सभी आपस में बात कर रहे थे। वैन की रफ्तार 100 से कम ही थी। मेरठ के परतापुर से वैन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस पर चढ़ी। यहां पर टोल प्लाजा है। इसके बाद अगला टोल प्लाजा डासना में है। इसके आने से पहले ही हादसा हो गया।
ओवरटेक करके आगे आई स्कूटी
शिवम ने बताया, वैन के पीछे स्कूटी चल रही थी। उसकी रफ्तार भी कम थी। नूरपुर पहुंचने पर स्कूटी चालक ने अचानक रफ्तार बढ़ाई। वह वैन को ओवरटेक करके आगे आ गया। स्कूटी और वैन के बीच बहुत कम फासला था। अवधेश को शायद ऐसा लगा कि टक्कर हो जाएगी। उसने स्कूटी को बचाने की कोशिश में तेजी से स्टेयरिंग घुमाया। इसी में वैन अनियंत्रित हो गई और डिवाइडर से जा टकराई।
वैन पलटते ही लग गई आग
शिवम का कहना है कि जैसे ही डिवाइडर से टकराकर वैन पलटी, वैसे ही उसमें आग लग गई। वह और अवधेश सबसे पहले गेट से बाहर आए। उनके शोर मचाने पर कुछ और लोग गाड़ी रोककर आ गए। उनकी मदद से अनुज और निशा को बाहर निकाला गया। तब तक आग विकराल हो गई। कार के पलटने से बीच वाली और पीछे की सीट टूट गई थी। इसी में चंद्रप्रकाश और सविता फंस गए।
चीखें थमीं और जिंदगी खत्म हो गई
सविता और चंद्रप्रकाश को बचाने के लिए पीछे वाला गेट खोलने की कोशिश की लेकिन यह नहीं खुला। यह स्लाइडिंग वाला गेट है, आसानी से खुलता नहीं है। थोड़ी ही देर में वैन आग का गोला बन गई। डर के मारे सब थोड़ा पीछे हट गए। मदद के लिए पुलिस को फोन मिलाने लगे। अंदर से चीखें सुनाई दे रहीं थी। हम लोग बेबस थे। आसपास पानी भी नहीं था। हम वहां से गुजर रहे लोगों से मदद की गुहार लगा रहे थे। कई लोग रुके, लेकिन वे भी हमारी तरह बेबस थे। वैन के अंदर से थोड़ी देर चीखें सुनाई दीं और फिर खामोश हो गईं। जिंदगी खत्म हो चुकी थी। हम सबकी आंखों के सामने ही वे दोनों जिंदा जल गए। इसके काफी देर बाद एक्सप्रेसवे की पेट्रोलिंग टीम आई। उसने आग बुझाई और एंबुलेंस मंगाई। बाकी चार लोगों को निजी अस्पताल पहुंचाया। वहां से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
कोई मेरी बहन को बचा लो...
सविता और चंद्रप्रकाश जब वैन में आग से घिरे थे, तब बुरी तरह झुलसे लोगों में शामिल ड्राइवर अवधेश चिल्ला रहा था, कोई मेरी बहन को बचा लो। सविता अवधेश की बहन थी। वह खुद झुलसा हुआ था लेकिन बहन को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली।
मृतक
1. सविता (22) पुत्री जगन्नाथ प्रसाद निवासी मकान नंबर 32ए, ओ ब्लॉक, दुर्गा कॉलोनी, रुड़की, हरिद्वार
2. चंद्रप्रकाश (25) निवासी सिरचंदी, भगवानपुर, हरिद्वार
अस्पताल में भर्ती
1. अवधेश पुत्र जगन्नाथ प्रसाद निवासी मकान नंबर 32, ओ ब्लॉक, दुर्गा कॉलोनी, रुड़की, हरिद्वार
2. अनुज पुत्र पप्पू सिंह, अमेठी, औरंगाबाद, हरिद्वार
3. निशा पुत्री पप्पू सिंह, अमेठी, औरंगाबाद, हरिद्वार