स्वनिधि योजना लोन की 80 प्रतिशत नहीं दे पा रहे किस्त
गाजियाबाद। कोरोना काल मे ठेली, पटरी विक्रेताओं को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत दिए गए लोन की वसूली बैंकों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है। जिले में करीब 23000 विक्रेताओं को 10-10 हजार की सहायता बैंकों से लोन के रूप में दी गई, लेकिन अब करीब ढाई करोड़ वसूलना बैंकों के लिए मुश्किल हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी लाभार्थियों से ऋण वसूली के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। करीब 80 प्रतिशत लोन लेने वाले किस्त नहीं दे पा रहे हैं।
पिछले साल जून में केंद्र सरकार ने योजना की शुरुआत की थी। इसका मकसद था कि लॉकडाउन में जिन लोगों का कारोबार प्रभावित हुआ है, उनकी मदद की जा सके। बैंकों ने अपने स्तर पर जागरूक कर लोन वितरित किया और लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर 10-10 हजार रुपये का ऋण वितरित किया गया। योजना के तहत जिले के एक लाख 11 हजार से अधिक का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें 42 हजार से अधिक का सर्वे किया जा चुका है। इनमें से 23 हजार से अधिक विक्रेताओं को लोन मिला। केंद्र सरकार से ऋण के लिए 14 करोड़ 77 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। बैंकों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 80 फीसदी लाभार्थियों ने लोन की किस्त भरना भी शुरू नहीं किया है। कुछ लाभार्थी का डाटा भी गलत निकल रहा है। बैंक अधिकारी लाभार्थियों को लोन पर लगने वाली ब्याज से बचाने के लिए संपर्क कर रहे हैं।
कोट
जिले में वितरित किए गए लोन को चुकाने के लिए एक वर्ष में प्रतिमाह किस्त के रूप में जमा करना है। डिजिटल भुगतान पर इंसेंटिव का लाभ भी लाभार्थी ले सकते हैं। समय पर किस्त का भुगतान करने पर सात प्रतिशत की ब्याज की सब्सिडी है। जिन लोगों ने किस्त जमा नहीं की है, उनसे संपर्क किया जा रहा है।
- एसपी यादव, अग्रणी बैंक प्रबंधक