गाजियाबाद पुलिस को आज यानी गुरुवार को बड़ी सफलता मिली है। जिले के गांव बसंतपुर सेन्थली में शख्स ने ढाई करोड़ की संपत्ति के लिए 20 साल में पांच परिजनों को मौत के घाट उतार दिया।
सबसे पहले भाई को मारा, फिर दो भतीजी और दो भतीजे की हत्या की। अब एक और भाई की हत्या की साजिश थी। किसी को हत्या की भनक तक नहीं लगने दी। पाचं में से एक भी हत्या की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी। पुलिस ने आरोपी लीलू त्यागी को दो साथियों संग गिरफ्तार किया है।
लीलू त्यागी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने यह गुनाह अपने इकलौते बेटे की खातिर किया। वह चाहता था कि संपत्ति का बंटवारा न हो, पूरी उसके बेटे को मिले। भाई ब्रिजेश के दो बेटे थे और सुधीर की दो बेटियां। चारों बच्चों की हत्या कर दी थी। इनसे पहले सुधीर की जान ली। अब ब्रिजेश भी निशाने पर था। इसकी साजिश तैयार कर चुका था। अगर इसमें कामयाब हो जाता तो संपत्ति का कोई और हिस्सेदार नहीं बचता।
लीलू से पूछताछ के हवाले से पुलिस ने बताया कि लीलू वह दो भाइयों की जमीन हड़पना चाहता था। उसने 20 साल पहले पूरी साजिश तैयार की थी। बड़ी भाई की हत्या के बाद उसकी पत्नी को अपने साथ रखना भी इसी साजिश का हिस्सा था, क्योंकि उसकी शादी नहीं हुई थी। भाई की पत्नी से जब उसे बेटा पैदा हो गया तो उसने सोच लिया कि इकलौते बेटे को पूरी संपत्ति दिलाएगा। पूछताछ में लीलू ने पुलिस को बताया कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। बल्कि हर हत्या के बाद वह मन ही मन खुश होता था। उसने बताया कि एक परिजन को मारने के बाद उसे अपनी संपत्ति बढ़ने का अहसास होता था। लीलू के मुंह से यह बात सुनकर पुलिस भी चौंक गई।
संपत्ति के लिए लीलू ने ऐसी साजिश रची कि परिजन भी गच्चा खा गए। लीलू एक के बाद एक परिवार के लोगों को मौत के घाट उतारता रहा और ऐसी दलीलें दीं कि परिजनों को थाने तक नहीं जाने दिया। लेकिन पांचवीं हत्या में की गई थोड़ी सी चूक ने उसकी करतूत उजागर कर दी।
8 अगस्त को रेशू के लापता होने के बाद लीलू उसके पिता ब्रिजेश के साथ उसकी खोजबीन का नाटक करता रहा। उसने रेशू पर भी आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए कहीं चले जाने का हवाला देते हुए मामले को पुलिस में न ले जाने की दलील दी। परिजन उसकी बातों में आ गए थे, लेकिन दूसरे व आखिरी बेटे के लापता होने से आहत ब्रिजेश त्यागी ने आखिरकार 15 अगस्त को मुरादनगर थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी।
पुलिस ने खूब हाथ-पांव पीटे, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। बुधवार तक पुलिस के पास सिर्फ लीलू और उसके मृतक भतीजे की एक ही स्थान पर लोकेशन के अलावा कोई दूसरा क्लू नहीं था। साक्ष्य न होने के चलते पुलिस भी हत्या का एंगल छोड़ने वाली ही थी कि एक कॉल रिकॉर्डिंग ने लीलू की साजिश बेनकाब कर दी। खुद पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर यह दोनों सुबूत न मिलते तो पांच हत्याओं राज हमेशा के लिए दफन हो जाता।
पहले नहीं देखी एसी साजिश : एसएसपी
लीलू द्वारा पांच परिजनों की हत्या कबूलने के बाद खुद पुलिस अधिकारी भी हैरान हैं। एसएसपी पवन कुमार का कहना है कि कत्ल की तमाम घटनाओं के खुलासे उन्होंने देखे हैं, लेकिन बीस साल में योजनाबद्ध तरीके से पांच परिजनों की हत्या और पुलिस में सूचना तक न जाने का मामला पहली बार देखा है। इस तरह की साजिश पेशेवर अपराधी भी नहीं कर पाते। लीलू ने न सिर्फ पांच हत्याएं कीं, बल्कि परिजनों को भी साधकर रखा।