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Ghaziabad News: जीडीए ने खाली कराई 800 करोड़ के लागत की जमीन

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इंदिरापुरम। जीडीए ने कनावनी गांव में करीब 800 करोड़ की लागत की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया। जीडीए की करीब दस हैक्टेयर (एक लाख वर्ग मीटर) जमीन पर करीब 50 से अधिक झुग्गियां बनी हुईं थीं। जीडीए ने यह कार्रवाई स्थानीय पार्षदों की शिकायत के बाद की है।
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प्राधिकरण उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बताया कि प्राधिकरण अपनी जमीन पर किसी भी तरह के अवैध कब्जे को सहन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि झुग्गियों को हटाने के लिए उन्हें स्थानीय पार्षदों की ओर से शिकायत भेजी गई थी। शिकायत में कहा गया कि प्राधिकरण की जमीन पर अवैध तरीके रोहिंग्या और बांग्लादेशियों ने कब्जा कर रखा था। जोकि न केवल झुग्गी बनाकर रह रहे थे बल्कि कई लोग धर्मकांटे और बिल्डिंग मैटेरियल का कारोबार भी कर रहे थे। इसके अलावा कुछ लोगों ने स्थायी तौर से निर्माण कर लिया था। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए दो बटालियन पीएसी के साथ इंदिरापुरम पुलिस के सहयोग से जमीन को खाली कराने का काम किया गया।

इनसेट- 1
जीडीए जल्द करेगा प्लॉटिंग
प्राधिकरण उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बताया कि जीडीए अपने इस भूखंड पर आवासीय प्लॉटिंग करेगा। ऐसे में दिल्ली के करीब रहने वाले लोग यहां प्लॉट खरीद सकेंगे। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई इस जमीन पर जल्द ही पिलर खड़े कर तार फैंसिंग की जाएगी। इसके बाद नियोजन के लिए पहले चरण की प्लानिंग की तैयारी की जाएगी।
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झुग्गी में रहने वाले लोग बोले- दस साल से दे रहे किराया
जीडीए जब अतिक्रमण हटा रहा था वहीं, दूसरी ओर झुग्गी में रहने वाले लोगों ने जीडीए की इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वह लोग दस वर्ष से झुग्गी का किराया भर रहे हैं। विरोध करते हुए लोगों ने कहा कि कोई गुर्जर है जो इस प्लॉट को अपना बताता है और प्रति माह लोगों से किराया वसूल कर ले जाता है। अब मानसून के दौरान अचानक जीडीए की इस कार्रवाई से लोगों ने नाराजगी जताई। इरशाद ने बताया कि वह और उनका परिवार करीब दस साल से इन झुग्गियों में रह रहे हैं। करीब बारह हजार का किराया जमीन के मालिक को दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बुलडोजर कार्रवाई में करीब पचास से अधिक झुग्गियों को तोड़कर ध्वस्त कर दिया गया है। जिनमें करीब 80 से अधिक परिवार रह रहे थे। झुग्गी में रहने वाली करिश्मा ने बताया कि जिस समय प्राधिकरण ने ध्वस्तिकरण की कार्रवाई शुरू की उस समय वह काम करने के लिए गई हुई थीं। वापस आकर देखा तो उनका आशियाना खंडहर बन चुका था। उन्होंने बताया कि यहां करीब 6 साल से अधिक समय से रह रही हैं। और सभी झुग्गियों का उनके सामान के हिसाब से किराया तय किया गया है। प्लॉट का मालिक 2000 रुपये से लेकर 15000 रुपये तक का किराया यहां रहने वाले लोगों से वसूल रहा है।
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