लखनऊ से लेकर दिल्ली तक जीडीए वीसी की शिकायत भी बीजेपी नेताओं के काम नहीं आई। जीडीए ने आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है। जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने हर जोन से ऐसे 10-10 बड़े प्रतिष्ठानों की सूची तैयार करने को कहा है, जिन पर सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
छोटे कामगारों पर कार्रवाई के बजाए जीडीए की सोच है कि बड़ी मछलियों पर कार्रवाई की जाए ताकि नजीर बन सके। बीजेपी के बड़े नेताओं ने जीडीए की अतिक्रमण हटाओं मुहिम का विरोध किया था। इसमें मंत्री से लेकर मेयर तक शामिल थे। इन सबने सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगायी थी। इसके बाद भी जीडीए वीसी डटी हैं।
आलाकमान से मिल रहे समर्थन का ही परिणाम है कि अब विभाग ने बड़ों पर शिंकजा कसने की तैयारी शुरु कर दी है।गाजियाबाद में आवासीय क्षेत्रों में हजारों की संख्या में प्रतिष्ठान संचालित हैं। इसमें छोटी दुकानों से लेकर मल्टी स्टोरी शोरुम भी हैं, जोकि अवासीय प्लाटों पर शान से कामर्शियल गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। इससे राजस्व को चूना और अवासीय भूभागों की माहौल भी प्रभावित हो रहा है।
इसके पीछे जीडीए की मंशा विरोध को थामने के लिए छोटों से पहले बड़े लोगों पर कार्रवाई करने की है।जीडीए वीसी के निर्देश पर ऐसे बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों सूची के लिए सर्वे का काम शुरू हो गया है। जीडीए सचिव रवींद्र गोडबोले का कहना है कि आवासीय क्षेत्र में गंभीर अनियमितता कर व्यावसायिक प्रतिष्ठान खड़ा करने वालों को बक्शा नहीं जाएगा। ऐसे प्रतिष्ठानों पर सबसे पहले कार्रवाई की जाएगी।
प्रवर्तन अनुभाग से जोन वार सूची मांगी गई है। जीडीए के मुताबिक उसने आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने वाले करीब आठ हजार लोगों को नोटिस दे रखे हैं, जिसके बाद से ही हड़कंप मचा हुआ है। यही वजह है कि लोग नेताओं के साथ मिलकर जीडीए की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी मानते हैं कि आधा दर्जन बड़े प्रतिष्ठान संचालित करने वाले लोग ही विरोध को हवा दे रहे हैं।
ऐसे में विभाग ने बीच का रास्ता निकाल कर छोटे लोगों को छोड़कर बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर ही कार्रवाई करने की तैयारी शुरु कर दी है। संभावना है कि अगले हफ्ते तक विभाग कार्रवाई शुरू कर देगा, जिसको लेकर पुलिस और प्रशासन से जल्द ही सहयोग मांगे जाने की भी खबर है।
जानकारी के मुताबिक पहले चरण में जीडीए ने ऐसे आवासों को चिंह्ति कर लिया था, जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हैं। इसी बीच बढ़ते विरोध के चलते आलाधिकारियों न तय किया कि पहले सिर्फ उन पर कार्रवाई हो जिन्होंने घर का नक्शा पास कराया और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खड़ा कर दिया। फिलहाल उन्हें नहीं छेड़ा जाए जो घर में कोई एक दुकान या बुटीक चलाकर रोजी-रोटी कमा रहे हैं।