नगर निगम अब शहर की विरासत को सहेजेगा। निगम का निर्माण विभाग अंग्रेजों के जमाने के एतिहासिक गेटों का जीर्णोद्धार कराएगा। महापौर की पहल पर निर्माण विभाग के इंजीनियर तीनों गेटों की रिपेयरिंग, पेंटिंग और लाइटिंग का एस्टिमेट तैयार कर लिया है। तीनों गेटों पर 10-10 फीट ऊंचाई तक रेड स्टोन लगाया जाएगा।
इन गेटों के कायाकल्प पर करीब 38 लाख रुपया खर्च किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस से पहले घंटाघर समेत तीनों गेट तिरंगी रोशनी में नहाए हुए नजर आने लगेंगे।अंग्रेजी शासनकाल में गाजियाबाद शहर चार गेटों जवाहर गेट (घंटाघर), दिल्ली गेट, सिहानी गेट और डासना गेट के बीच बसता था।
इतिहासकारों की मानें तो सुरक्षा के चलते शाम के समय चारों गेट बंद कर दिए जाते थे। गाजियाबाद का विकास हुआ तो आबादी बढ़ती गई और इन चार गेटों की महत्वता कम हो गई। यही वजह रही कि देखरेख के अभाव में सिहानी गेट जर्जर होकर ढह गया, जबकि तीन गेट अभी भी गाजियाबाद के आजादी से पहले के दिनों के गवाह बने हैं।
शहर की एतिहासिक धरोहर के रूप में इन तीनों गेटों की मरम्मत और सौंदर्यीकरण की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन निगम अफसरों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। हालत यह है कि अब इन गेटों पर लोगों ने अवैध रूप से बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगा लिए हैं। कब्जे कर लिए हैं और रखरखाव के अभाव में इनमें दरारें आने लगी हैं।
निर्माण विभाग ने तीन गेटों जवाहर गेट (घंटाघर), दिल्ली गेट और डासना गेट के जीर्णोद्धार का एस्टिमेट तैयार कर लिया है।
तीनों गेटों से अवैध कब्जे हटाकर इनकी मरम्मत कराई जाएगी। घंटाघर पर लगी घड़ी को ठीक कराएंगे और तीनों गेटों पर रंग-बिरंगी रोशनी वाली लाइटें लगाई जाएंगी। शाम के वक्त इन लाइटों को संचालित किया जाएगा। पुरानी विरासत को बचाने के लिए नगर निगम प्रयास करेगा। - अशु वर्मा, मेयर