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गढ़मुक्तेश्वर: ठिठुरती सर्दी भी नहीं रोक पाई आस्था की राह, मार्गशीष पूर्णिमा पर दो लाख से अधिक ने गंगा में डुबकी लगाई

Sun, 19 Dec 2021 12:39 PM IST
अनुराग सक्सेना संवाद न्यूज एजेंसी, गढ़मुक्तेश्वर/हापुड़

सार

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर कड़ाके की ठंड के बावजूद भी गंगानगरी ब्रजघाट में आस्था का सैलाब उमड़ा। पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को आगमन शनिवार की शाम से ही शुरू हो गया था।
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गढ़मुक्तेश्वर में गंगा स्नान करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मार्गशीर्ष पूर्णिमा के पावन पर्व पर विभिन्न प्रांतों से आए दो लाख से भी अधिक भक्तों ने पति पावनी गंगा मैय्या में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्यार्जित किया। वहीं मंदिरों में पूजा-अर्चना कर दान-पुण्य भी किया।

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मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर कड़ाके की ठंड के बावजूद भी गंगानगरी ब्रजघाट में आस्था का सैलाब उमड़ा। पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को आगमन शनिवार की शाम से ही शुरू हो गया था। अधिकांश गंगा भक्तों ने रविवार को ब्रह्म मुहूर्त प्रारंभ होते ही हर हर गंगे के जयकारों के बीच मोक्ष दायिनी में डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू कर दिया। वहीं पूठ और लठीरा के कच्चे घाटों पर भी स्थानीय लोगों ने स्नान किया।

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गंगा स्नान के बाद काफी भक्तों ने तीर्थ पुरोहितों से भगवान सत्यनारायण की कथा सुन उन्हें दक्षिणा दी। भक्तों ने मंदिरों में पहुंचकर अपने ईष्ट देवों के समक्ष मत्था टेका।

कंपकंपाती सर्दी भी भक्तों की आस्था को नहीं रोक सकी

सर्द हवा चलने के कारण रविवार को ठंड का प्रकोप काफी बढ़ गया था। इसके बावजूद भी गंगा मैया के प्रति अटूट आस्था लेकर आए भक्तों का हौंसला नहीं डिग पाया, जिन्होंने कड़ाके की सर्दी की कोई भी परवाह किए बिना वैदिक रीति रिवाज के साथ गंगा में डुबकी लगाई।

गरीब-निराश्रितों को भोजन और वस्त्र का दान दिया

विभिन्न स्थानों से आए गंगा भक्तों ने गंगा स्नान करने के बाद तीर्थनगरी में इधर उधर घूम रहे गरीब-निराश्रितों को भोजन और वस्त्र का दान देकर पुण्यार्जित किया।

रैन बसेरे और अलाव की रही व्यवस्था

पालिकाध्यक्ष सोना सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए ब्रजघाट में रैन बसेरे की व्यवस्था दुरुस्त रखी गई। वहीं शनिवार की रात मुख्य चौराहों व बाजार समेत अन्य स्थानों पर अलाव की भी व्यवस्था की गई ताकि श्रद्धालुओं को अधिक परेशानी न हो।
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