गाजियाबाद/मुरादनगर। अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट चिराग त्यागी की हत्या अचानक हुए किसी विवाद का नतीजा नहीं, बल्कि डेढ़ साल से पल रही रंजिश का अंत निकली। पुलिस के अनुसार, आरोपी यश खटीक ने स्वीकार किया है कि उसने दोस्ती व भरोसे का फायदा उठाकर चिराग की जान ली है। करीब डेढ़ वर्ष पहले राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए अयोग्य घोषित होने के बाद से वह चिराग से बदला लेने की योजना बना रहा था। वह इसके लिए चिराग को दोषी मानता था।
इस बीच रविवार दोपहर चिराग का शव उनके गांव बसंतपुर सैंथली पहुंचते ही माहौल गम और गुस्से में बदल गया। ग्रामीणों और परिजनों ने पहले मेरठ रोड पर जाम लगाने का प्रयास किया। उसके बाद गांव के प्रमुख मार्ग को दोपहर तीन से शाम चार बजे तक जाम रखा।
उन्होंने आरोपी के एनकाउंटर की मांग की। मौके पर पहुंचे कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ और एडिशनल सीपी केशव चौधरी ने परिवार को किसी तरह समझाकर यातायात सुचारु कराया। शाम को गांव के श्मशान घाट पर चिराग का अंतिम संस्कार किया गया
एसीपी कोतवाली उपासना पांडेय ने बताया कि मुरादनगर के रावली रोड निवासी यश और बसंतपुर सैंथली गांव निवासी चिराग करीबी दोस्त थे। दोनों साथ में प्रैक्टिस करते थे और एक-दूसरे के घर भी आते-जाते थे। बंगलूरू में 8वीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण व रजत पदक जीतने के बाद चिराग के दिल्ली पहुंचने पर यश शनिवार तड़के उनसे मिलने पहुंचा।
उसने पदक जीतने पर उसे बधाई दी और साथ घर चलने की बात कही। दोनों अक्सर साथ आते-जाते थे, इसलिए चिराग को उस पर शक नहीं हुआ। दोनों दिल्ली से कैब में सवार होकर निकले और करीब 11 बजे साईं उपवन पहुंचे। यश ने चिराग से कहा कि उसे एक परिचित से 50 हजार रुपये लेने हैं और इन्हीं रुपयों से वह उसकी उधारी भी चुका देगा। इस बहाने वह चिराग को उपवन के भीतर ले गया।
एसीपी ने बताया कि उपवन में दोनों टहलते हुए बातचीत करने लगे। इस दौरान चिराग कुछ कदम आगे निकल गया। मौका देखते ही यश ने पीछे से उस पर गोलियां चला दीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दो गोलियां लगने की पुष्टि हुई है। हत्या के बाद आरोपी अपने घर पहुंच गया। पुलिस ने शक के आधार पर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ में उसने पूरा घटनाक्रम बता दिया।