राष्ट्रपति से सर्वोच्च सम्मान पाकर इतिहास में दर्ज किया नाम
साहिबाबाद। भारतीय वायुसेना के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चार यूनिटों को किसी भी सैन्य इकाई को दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान राष्ट्रपति मानक एवं रंग से सम्मानित किया। शुक्रवार को हिंडन एयरफोर्स के परिसर में हुआ कार्यक्रम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। पहली बार एक ही समारोह में चार यूनिटों को राष्ट्रपति मानक और रंगों का सम्मान मिला। वहीं, एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी, एयर मार्शल पंकज और विभास पांडेय ने परेड की सलामी ली। इस बीच केंद्रीय राज्यमंत्री सांसद वीके सिंह व लोक निर्माण विभाग के मंत्री जितिन प्रसाद व अन्य वायुसेना अधिकारी पहुंचे।
वायुसेना स्टेशन के स्थल पर आठ टुकड़ियों में जवानों ने मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और अन्य अतिथियों को वायुशक्ति धुन पर कदमताल कर सलामी दी। औपचारिक परेड की कमान 11 बीआरडी के ग्रुप कैप्टन केएस शानू नायर ने की। इस बीच मिग-17 और सी-129 हेलिकॉप्टर से जवानों ने सैल्यूट किया। चारों यूनिटों के जवानों द्वारा सम्मान मिलते देखने के लिए उनके परिजनों के अलावा भारतीय वायुसेना के अधिकारी शामिल रहे। सलामी लेने के बाद राष्ट्रपति ने परेड का निरीक्षण किया। खास बात रही कि राष्ट्रपति का मानक सम्मान 45 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन एम सुरेंद्रन और 221 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन शुभांकन ने लिया जबकि राष्ट्रपति रंग सम्मान 11 बेस रिपेयर डिपो के एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर कमोडोर आशुतोष वैद्य व 509 सिग्नल यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन विवेक शर्मा ने प्राप्त किया।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में सभी यूनिटों के योगदान और जवानों के अदम्य साहस व ऐतिहासिक विजयी गाथा को भी बयां किया। उन्होंने कहा कि 1949 में गठित 45 स्क्वाड्रन फ्लाइंग डैगर्स ने 1965 एवं 1971 युद्धों के द्वारा अपने अनेक ऑपरेशन चलाकर सम्मान पाया है । पुराने वैम्पायर से शुरू हुई स्क्वाड्रन की यात्रा मिग-21 से होते हुए स्वदेशी तेजस के माध्यम से आगे बढ़ रही है। वहीं, वर्ष 1963 से गठित 221 स्क्वाड्रन वॉरियर्स ने भी 1965 और 1971 के युद्ध में असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया। इन्होंने बांग्लादेश मुक्ति संघर्षों के दौरान आक्रमण व योद्धा से अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया है। इतना ही नहीं, कारगिल युद्ध में ऑपरेशन सफेद सागर के द्वारा भारतीय वायुसेना ने एक चौथाई मिशन संचालित किए थे।
भारत का पहला 11 बेस रिपेयर डिपो
उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना का एक अग्रिम बेस रिपेयर डिपो है जिसे सेंट्रल फॉर मिलिट्री एयर ऑर्डिनेंस के द्वारा डिजाइन एंड लाइव एक्सटेंशन एजेंसी का दर्जा प्रदान किया है। इस डिपो ने लड़ाकू विमानों के लाइव एक्सटेंशन करके उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही रखरखाव में स्वदेशीकरण अपनाकर आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्यों की तरफ भी कदम बढ़ाया है।
509 सिग्नल यूनिट
इस सिग्नल यूनिट की स्थापना एक मार्च 1965 को हुई थी। यह यूनिट उन वायु रक्षा प्रणालियों का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है जो हवाई गतिविधियों की निगरानी करती है। यह सदा तत्पर रहकर अपने आदर्शों पर निष्ठापूर्वक अडिग रही है। यह यूनिट 1995 से टीएचएडी रडार के साथ लिंक में है। यूनिट के इतिहास में महत्वपूर्ण क्षण 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध से जुड़े हैं, जिसमें 509 सिग्नल यूनिट पूर्वी पाकिस्तान पर सभी वायु रक्षा गतिविधियों के केंद्र के रूप में उभरा था।
साड़ी के रंग से यूनिट की पहचान
सम्मान समारोह में जिन चार यूनिटों को राष्ट्रपति द्रौपर्दी मुर्मू ने सम्मानित किया था। उनके परिवार की या उनसे जुड़ी सात-आठ महिलाओं ने अलग-अलग समूह में रंग-बिरंगी साड़ियां पहनी थीं। इस तरह वे सभी अपनी-अपनी यूनिटों को प्रदर्शित कर रही थीं। सुनहरे रंग की साड़ी पहनकर पहुंचीं महिलाएं 509 सिग्नल यूनिट का समर्थन कर रही थीं।
45 स्क्वाड्रन की यह है खासियत
45 स्क्वाड्रन की स्थापना 1959 में हुई थीं। यह फ्लाइंग डैगर्स के नाम से भी मशहूर है। स्क्वाड्रन ने 1960 में पुर्तगाल शासन के खिलाफ गोवा की मुक्ति के लिए ऑपरेशन विजय में भाग लिया था। इसके अलावा, स्क्वाड्रन ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी अहम भूमिक निभाई थी। स्क्वाड्रन पंजाब और राजस्थान सेक्टरों की वायु रक्षा के लिए जिम्मेदार थी। स्क्वाड्रन ने 258 मिसन उड़ाए थे।
221 स्क्वाड्रन की यह है खासियत
14 फरवरी 1963 को वैम्पायर विमान से सुसज्जित बैरकपुर में 221 स्क्वाड्रन की स्थापना हुई थी, जिसे वैलिएंट्स के नाम से भी जाना जाता है। गठन के करीब दो साल बाद ही स्क्वाड्रन को 1965 के भारत-पाक युद्ध में तैनात किया गया, जहां स्क्वाड्रन ने सराहनीय काम किया। अगस्त 1968 में स्क्वाड्रन Su-7 सुपरसोनिक अटैक फाइटर से पुनः सुसज्जित होने वाले पहले स्क्वाड्रनों में से एक था। 1971 के भारत-पाक युद्ध में भी पूर्वी थिएटर कमांड के साथ स्क्वाड्रन ने कंधे से कंधे मिलाकर काम किया। स्क्वाड्रन ने जवाबी कार्रवाई, हवाई सहायता और टोही मिशनों में शानदार काम किया।
11 बेस रिपेयर डिपो और 509 सिग्नल यूनिट की यह है खासियत
11 बेस रिपेयर डिपो अप्रैल 1974 में अस्तित्व में आया था। स्थापना ओझर, नासिक के रखरखाव कमान के तहत हुई थी। 11 बेस भारतीय वायुसेना का एक प्रमुख और एकमात्र लड़ाकू विमान बेस रिपेयर डिपो है। डिपो ने सबसे पहले Su-7 विमान की मरम्मत की थी। इसके बाद तो डिपो ने मिग-21, मिग-23 और मिग-29 विमानों के वेरिएंटो सहित तमाम विमानों की मरम्मत की है। 509 सिग्नल यूनिट की स्थापना एक मार्च 1965 में हुई थी। वर्तमान में यह मेघालय में वायु रक्षा दिशा केंद्र के रूप में काम कर रही है। 1971 का बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में यूनिट का योगदान सराहनीय था।