मीट की दुकान चलाने के लिए अब पांच विभागों से एनओसी लेनी होगी। जिला प्रशासन, पुलिस, पशुपालन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम मिलकर कॉमन पॉलिसी तैयार करेंगे।
पांचों विभागों की इस ज्वाइंट पॉलिसी के आधार पर मीट की दुकानों को नगर निगम लाइसेंस जारी करेगा। डीएम ने शुक्रवार को सभी विभागों की बैठक लेकर पॉलिसी तैयार करने और सिंगल विंडो परमिशन देने के निर्देश दिए हैं।
मीट की दुकानों को लाइसेंस देने के लिए नगर निगम का अपना अलग एक्ट है और फूड सेफ्टी विभाग का अलग। 2012 में एनजीटी ने मीट की अवैध दुकानों पर प्रतिबंध लगाने के लिए नगर निगम को जिम्मेदारी दी थी। इसको लेकर पांच विभागों की कमेटी भी गठित की गई थी।
बावजूद इसके यह कमेटी शहर में एक भी लाइसेंस जारी नहीं कर पाई। बिना लाइसेंस के ही अवैध दुकानें धड़ल्ले से संचालित हो रही थीं। अब प्रदेश में सरकार बदलने के बाद सख्ती हुई तो विभागों को लाइसेंस जारी करने की याद आई।
शुक्रवार को डीएम निधि केसरवानी ने इन सभी विभागों के अफसरों की मीटिंग बुलाई। उन्होंने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को सभी विभागों से कोऑर्डिनेशन कर कॉमन पॉलिसी तैयार करने के लिए कहा है। इस पॉलिसी में सभी विभागों से संबंधित शर्तें होंगी।
इन शर्तों का पालन कर मीट की दुकान खोलने के इच्छुक व्यक्तियों को सभी विभागों से एनओसी लेनी होगी। इसके बाद ही नगर निगम उन्हें लाइसेंस देगा। अब इस मामले में डीएम ने सोमवार को फिर पांचों विभागों की बैठक बुलाई है।
मीट की दुकानों के लिए सिंगल विंडो बनाई जाएगी। संबंधित विभागों से एनओसी लेने के बाद नगर निगम को लाइसेंस जारी करने के लिए अधिकृत किया जाएगा। लाइसेंस लेने के बाद भी मीट की दुकान चलाने वालों को नियमों का पालन करना होगा। - निधि केसरवानी, डीएम