आईएएस अधिकारी कंचन वर्मा को जीडीए उस हालातों में मिला जब उसकी माली हालत तो बिगड़ी हुई है ही, भ्रष्टाचार के मामले में भी जीडीए का नाम देश भर में चर्चाओं में हैं। ऐसे में नवनियुक्त उपाध्यक्ष के सामने चुनौती कड़ी हैं।
कंचन वर्मा ने भी पहले ही दिन करीब ढाई घंटे लगातार अफसरों की मीटिंग लेकर साफ कर दिया कि पहले ही दिन से उन्होंने भी इन चुनौतियों पर काम भी शुरू कर दिया और भ्रष्टाचार करने वालों की अब खैर नहीं।
देर शाम तक जीडीए कार्यालय में उन्होंने सचिव रवींद्र गोडबोले, ओएसडी आरपी पांडेय, डीपी सिंह, चीफ टाउन प्लानर इश्त्यिाक अहमद, चीफ इंजीनियर एससी द्विवेदी और वित्त नियंत्रक टीआर यादव समेत कई सीनियर अफसरों के साथ बैठक कर पूरा फीड बैक लिया।
बैठक में जीडीए की परियोजनाओं से लेकर सीएजी ऑडिट तक सभी मुद्दों पर मंथन हुआ। कंचन वर्मा की गिनती यूपी की तेजतर्रार आईएएस अफसरों में होती है। पहली बार किसी प्राधिकरण प्रमुख का पदभार संभालने वालीं कंचन वर्मा बरेली में एसडीएम, गौतमबुद्धनगर में सीडीओ, अमरोहा, फतेहपुर और मिर्जापुर में डीएम भी रह चुकी हैं।
कार्यभार संभालने के बाद जीडीए में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और जीडीए के कार्यों में अंतर होने की वजह से उन्हें वर्किंग समझने में थोड़ा वक्त तो जरूर लगेगा, लेकिन जीडीए की तस्वीर जरूर बदलेगी। उन्होंने कहा कि मेट्रो और एलिवेटेड रोड ही नहीं, सभी प्रोजेक्टों को समय पर पूरा कराने पर फोकस रहेगा।
जो रुके हुए प्राजेक्ट हैं उन्हें रिवाइव कराया जाएगा। इन प्रोजेक्ट में जो भी बाधाएं होंगी उनका निराकरण कराया जाएगा। फिर यह बाधाएं चाहे स्थानीय स्तर की हो या शासन स्तर की। उन्होंने कहा कि जीडीए के पास संसाधनों की कमी नहीं है। आज माली हालत ठीक नहीं, इसलिए फंड के संकट को दूर करने के लिए प्रयास करेंगे।
इसके लिए सरकार से फंड शेयरिंग और लोन लिया जाएगा। अपने संसाधनों से फंड जनरेट करने के लिए सभी विकल्पों को खुला रखा है। रुकी हुई आवासीय योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। बिल्डर माफिया पर शिकंजा कसा जाएगा।
जीडीए देखेगा किन रिहायशी प्रोजेक्ट में कितने यूनिट बन चुके हैं। देरी क्यों हो रही है। यह भी वर्कआउट करेंगे कि इन योजनाओं को किस तरह से बूस्ट किया जा सकता है।