गाजियाबाद। पटेलनगर स्थित ऊदलनगर के आवासीय क्षेत्र में तीन मंजिला भवन में चल रहे एसी सर्विस सेंटर में भीषण अग्निकांड से 72 वर्षीय केयरटेकर त्रिलोकी नाथ की जान चली गई। शुक्रवार देर रात करीब सवा दो बजे लगी आग ने देखते ही देखते पूरे भवन को चपेट में ले लिया। अंदर सो रहे 11 श्रमिक मुख्य गेट पर ताला लगा होने से फंस गए। हथौड़े से ताला तोड़कर किसी तरह 10 लोग ही सुरक्षित बाहर निकल सके।
इसी दौरान सेंटर में रखे कंप्रेशर व गैस सिलिंडरों में हुए धमाके ने आग को और भड़का दिया। वैशाली, साहिबाबाद और मोदीनगर से पहुंची दमकल के आठ वाहनों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। तब तक सेंटर में खड़ी दो कार और 13 बाइक समेत करीब ढाई करोड़ रुपये का सामान जल चुका था। शुरुआती जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा है।
धमाकों से दहल उठा क्षेत्र
पुलिस के अनुसार, टायर मार्केट में आबादी के बीच मसूरी थाना क्षेत्र के मसौता गांव निवासी ओंकार तोमर का तीन मंजिला भवन में ऑन स्पॉट नाम से एसी सर्विस सेंटर है। भवन भी ओंकार का ही है। यहां काम करने वाले राकेश कुमार ने बताया कि हादसे के वक्त वह नौ अन्य कर्मचारियों के साथ भूतल पर सो रहे थे। आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। बाहर निकलने का प्रयास किया तो भवन के मुख्य गेट पर ताला लगा था। उसकी चाबी सेंटर में काम करने वाला अजय के पास थी, जो तीसरी मंजिल की छत पर सोया हुआ था। आग की विकराल लपटों के कारण वह सीढ़ियों से नीचे नहीं आ सका। ऐसे में जान बचाने के लिए हथौड़े से ताला तोड़ा और किसी तरह बाहर आए। वहीं, अजय सीढ़ी लगाकर पड़ोसी की छत से निकला। इसी बीच धमाके सुनकर आसपास के लोग भी इकट्ठा हो गए।
बैग लेने गए, लौट नहीं पाए
हादसे में जान गंवाने वाले अयोध्या के खंडासा गांव निवासी त्रिलोकी नाथ सेंटर में करीब 15 वर्षों से कार्यरत थे। राकेश ने बताया कि त्रिलोकी भी उनके साथ सुरक्षित बाहर निकल आए थे, लेकिन उनका बैग अंदर रह गया था। वह उसे लेने अंदर गए और फिर नहीं लौटे। उन्हें रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं माने। वह सीढ़ियों के पास तक पहुंच गए थे और फिर जहरीले धुएं व ऑक्सीजन की कमी के कारण बेहोश होकर गिर पड़े। आग की लपटें तब तक पूरे भवन को चपेट में ले चुकी थीं, इस कारण कोई उन्हें बचाने के लिए अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। आग बुझने के बाद दमकल और पुलिस सेंटर के अंदर पहुंची तो उनका जला हुआ शव मिला। पुलिस ने शव मेडिकल परीक्षण कराकर परिजनों को सौंप दिया। कर्मचारियों के अनुसार, त्रिलोकी को दिखाई और सुनाई कम पड़ता था।
एहतियातन आसपास के घर कराए खाली
सर्विस सेंटर का वोल्टास, डैकिन, मित्सुबिशी, ब्ल्यू स्टार समेत एसी निर्माता कई कंपनियों से अनुबंध है। भवन के तीनों तलों पर सैकड़ों एसी और इनमें भरी जाने वाली गैस के सिलिंडर रखे थे। आग की चपेट में आकर एसी के कंप्रेशर और सिलिंडर एक-एक कर फटने लगे। इससे आग तेजी से फैल रही थी। इसे देखते हुए सिहानी गेट पुलिस ने एहतियातन आग से प्रभावित भवन के चारों ओर स्थित घरों को खाली कराकर वहां रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। कंप्रेशर और सिलिंडर फटने से उठे जहरीले धुएं से लोगों को काफी परेशानी हुई। कई लोग खिड़की-दरवाजे बंद कर खुद घरों से बाहर आ गए। दमकल की टीम भी मास्क पहनकर भवन में घुसी।
आग से बचाव के साधन न इंश्योरेंस
आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि होने के बावजूद दमकल विभाग को मौके पर आग से बचाव के कोई साधन नहीं मिले। मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि आवासीय भवन होने के कारण वह नोटिस भी जारी नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि भूतल पर खराब एसी, कंप्रेशर, गैस सिलिंडर आदि रखे थे। दूसरी मंजिल पर लैब थी, उसमें एसी की मरम्मत की जाती थी। साथ ही यहां टिन शेड में प्लाईवुड लगाकर अलग-अलग केबिन बनाए गए थे। तीसरी मंजिल पर सेंटर के मालिक ओंकार सिंह का कार्यालय और कारीगरों के लिए कमरे थे। ओंकार ने बताया कि अधिकांश सामान प्लास्टिक, तांबा और सिल्वर का था। भूतल का ऐसा कोई कोना नहीं बचा, जहां तक आग न पहुंची हो। सेंटर का इंश्योरेंस नहीं था।
पटेल नगर स्थित एसी सर्विस सेंटर में लगी आग को बुझाते दमकलकर्मी। स्रोत: वीडियोग्रैब
पटेल नगर स्थित एसी सर्विस सेंटर में लगी आग को बुझाते दमकलकर्मी। स्रोत: वीडियोग्रैब
पटेल नगर स्थित एसी सर्विस सेंटर में लगी आग को बुझाते दमकलकर्मी। स्रोत: वीडियोग्रैब