गाजियाबाद। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत दाखिला नहीं देने वाले स्कूलों के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी। स्कूल प्रिंसिपलों के साथ बैठक में एसडीएम ने साफ कर दिया कि शासनादेश पर अमल करते हुए दाखिले करें, वरना प्रशासन के पास कई तरीके हैं।
बैठक के शुरुआती दौर में स्कूल प्रशासन दाखिले नहीं देने के ही बहाने अधिकारियों को गिनवाते रहे। इससे नाराज एसडीएम शैलेश प्रताप सिंह ने स्कूल प्रधानाचार्यों को कहा कि उन्हें शासनादेश का पालन करना होगा।
स्कूल खुलने से लेकर निर्माण तक और समय-समय पर शासन की कई योजनाओं के तहत वह छूट हासिल करते हैं। इस एवज में 25 प्रतिशत गरीब बच्चों के दाखिले से वे इंकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि शासन और हाईकोर्ट के आदेश का पालन यदि वे नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
बता दें कि बेसिक शिक्षा विभाग ने अब तक 436 बच्चों को आरटीई के तहत दाखिले के लिए सत्यापित किया है। इनमें से 99 बच्चे ऐसे हैं जिनका दाखिला आठ स्कूलों में होना है। इन्हें पिछले तीन माह से स्कूल प्रशासन टाल रहा था। बैठक में डीआईओएस राज सिंह यादव, बीएसए प्रवेश यादव, आरटीई नोडल ऑफिसर पवन भाटी, एबीएसए इंद्रा चौहान आदि मौजूद रहे।
बैठक में ये इन स्कूलों के प्रतिनिधि रहे शामिल
बैठक में डीएवी प्रताप विहार, डीएवी राजेंद्र नगर, डीडीपीएस गोविंदपुरम, डीडीपीएस अशोक नगर, ब्राइटलैंड पब्लिक स्कूल गोविंदपुरम, डीपीएस कल्लूगढ़ी डासना, डीपीएसजी मेरठ रोड और मदर इंडिया पब्लिक स्कूल नंदग्राम के प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठक में डीपीएस सिद्धार्थ विहार और सीपीएफपी स्कूल की ओर से कोई नहीं पहुंचा। इन स्कूलों अब डीएम की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा।
बहाने कैसे-कैसे
- आरटीई में दाखिला देने से सीधे तौर पर इंकार करने की बजाय स्कूलों ने कई बहाने बनाएं।
- अच्छे घरों के बच्चों का आईक्यू लेवल हाई होता है। उनके साथ आरक्षित सीट के बच्चे एडजस्ट नहीं कर सकेंगे।
- आरटीई के तहत पांच-पांच वर्ष के बच्चों का दाखिला नर्सरी में करने को कहा जा रहा है, जिनकी उम्र क्लास के बच्चों से दो साल अधिक होगी। ऐसे में वे अन्य बच्चों से मारपीट कर सकते हैं।
- फैमिली बैक ग्राउंड शिक्षित न होने पर ऐसे बच्चों का स्कूल में सर्वाइव करना मुश्किल होगा।
- पब्लिक स्कूलों में दाखिले फरवरी मार्च में ही खत्म हो गए, अब तक काफी सिलेबस पढ़ाया जा चुका है, ऐसे में सिलेबस कवर कराने में मुश्किल आएगी।