वेव सिटी बिल्डर के खिलाफ काकी लम्बे समय से डेढ दर्जन गांवों के किसान आंदोलन कर रहे हैं। मगर किसानों की समस्याओं का अभी तक कोई समाधान नहीं होने से नाराज होकर बुधवार 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक भारतीय किसान संगठन व किसान संघर्ष समिति के बैनर तले कई गांवों के किसान ने वेव सिटी का मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिया।
वहीं पल बिछाकर धरने पर बैठ गए। लगभग तीन घंटे गेट पर आवाजाही बंद करने के बाद मौके पर उपजिलाधिकारी सदर अरुण दीक्षित और जीडीए अपर सचिव प्रदीप कुमार पहुंचे और किसानों की समस्याओं का 12 सितम्बर को जीडीए में बिल्डर व किसानों की वार्ता कराकर समाधान कराने का अश्वासन देकर धरना स्थगित कराया।
किसान नेता टीकम नागर व लोकेश नागर ने कहा कि किसानों से बिल्डर ने जो लिखित व मौखिक समझौते किये हैँ वो अब से लगभग आठ साल पहले लागू किये जाने थे। लेकिन आज तक उक्त समझौतों को बिल्डर द्वारा अमल मे नहीं लाया गया, सरकार द्वारा बिल्डर को लाइसेंस देकर बीस साल से किसानों को बंधक बना कर रख दिया गया है।
किसानों की जमीनों का उचित मुआवजा तय नहीं किया गया है। प्रभावित किसानों को घोषित आठ प्रतिशत प्लाट नहीं दिए गए हैं। भूमिहीनों को घोषित फ्लैट या प्लाट नहीं दिए गए। प्रभावित किसान परिवारों की रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
जिसकी वजह से गांवों का समग्र विकास नहीं हो पा रहा है। समझौते में सभी प्रभावित किसानों को शामिल नहीं किया गया। जब तक किसानों की सभी मांगे पूरी नहीं हो जाती है तब तक ये किसानों का संघर्ष जारी रहेगा। इस दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा। धरने में मुख्य रूप से आनन्द नागर, भारतीय किसा संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र यादव, लोकेश नागर, धर्मवीर प्रधान, महेंद्र प्रधान, प्रवीन प्रधान, सतीश त्यागी, बालेश्वर प्रधान, धर्मजीत प्रधान, भोजी प्रधान, रतिराम बाबूजी, रूपम यादव, शीशपाल चौधरी, मनोज यादव, राजू शर्मा आदि रहे।