किसानों ने लौटते हुए सभी से गले मिलकर ली विदा
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करीब 13 माह लंबे किसान आंदोलन के सफल होने पर गाजियाबाद के यूपी गेट से किसानों के जत्थे बुधवार को अपने गांव-घर के लिए रवाना हुए तो उनके चेहरों पर दोहरी खुशी थी। इस 13 महीनों में न खेत की चिंता की, न घर परिवार की। बस चिंता थी तो सिर्फ किसानों के लिए बनाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस कराने की। बुधवार को यूपी गेट से घरों के लिए रवाना होते हुए किसानों का कहना था कि ‘13 महीने तै सरकार कू देखरे थे, काम हो गया, इब चलकै घरबार देखेंगे...'।
गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के चेहरों पर लंबे समय बाद घर लौटने की खुशी तो थी ही, लेकिन इससे ज्यादा खुशी तीन कृषि कानूनों के रद्द होने की थी। बागपत के इंद्रपाल सिंह, कासिपुर खेड़ी के उपेंद्र तोमर, सबगा निवासी विजयपाल, लुहारी निवासी हरेंद्र, थल नांगल निवासी जुल्ला प्रधान समेत उनके साथियों का पूरा जत्था करीब एक साल से गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में शामिल था।
बीच में कुछ दिन के लिए गांव गए थे, लेकिन कई महीनों से यही पर डटे थे। इन किसानों का कहना था कि ‘हमै इस बात पर थोड़ा सा भी शक ना था अक ये कानून वापस न होवे। पहले दिन तै पता था अक कानून तो सरकार कू वापिस लेने पड़ेंगे’। इन 13 महीनों मैं सरकार हमै देखरी थी और हम सरकार कू देखरे थे। अब दोनों का काम हो गया, चलकै घर-परिवार कू देखैंगे।
खेतों में काम करेंगे, गन्ना मिल तक है पहुंचाना
गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद किसानों का कहना था कि 13 महीनों से उन्होंने न तो अपने खेतों को देखा और ना फसल का अता पता। अब गन्ने की फसल पक गई है। मिलों में गन्ना पहुंचाना है।