गाजियाबाद। भोजपुर थाना पुलिस की लापरवाही उजागर होने के बाद फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। क्राइम ब्रांच की टीम ने पासपोर्ट आवेदन पर दर्ज किए गए पांच मोबाइल नंबर की लोकेशन और पते निकाले। सभी सिम दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्र से खरीदे गए हैं। ये सिम भी फर्जी पते और आधार कार्ड देकर खरीदे गए हैं।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम सबसे पहले फर्जी पासपोर्ट बनाने के उद्देश्य को खंगालेगी। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीम गठित की गई हैं। मंगलवार को एक टीम ने आवेदनों पर दर्ज किए गए पांच मोबाइल नंबर की लोकेशन और उनके पते पर काम किया है।
ये सिम भी फर्जी आईडी पर संचालित हो रहे थे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि गिरोह के सदस्यों की दूरसंचार कंपनी में भी साठगांठ है। पकड़े गए पोस्टमैन और भोजपुर थाने के मुंशी के मोबाइल नंबरों पर हुई बातचीत खंगाली जा रही है। कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर भी सामने आए हैं।
टीम भोजपुर, त्यौडी व सैदपुर हुसैनपुर गांव में लगे सीसीटीवी और आधार ट्रांसीवर स्टेशन (बीटीएस) का डाटा भी जांच रही है। आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह दिल्ली से ही संचालित हो रहा है। हालांकि, इसमें बाहरी राज्यों के लोग शामिल हैं।
पुलिस पकड़ से दूर मुंशी दीपक
भोजपुर थाने में तैनात मुंशी दीपक कुमार फर्जी पासपोर्ट की रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर तक पहुंचने के दौरान से ही लापता है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। जांच में सामने आया है कि मुंशी ने पांच अलग-अलग टैबलेट और उप निरीक्षकों को विश्वास में लेकर रात के समय में सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण की है।
अधिकांश पोसपोर्ट सिख समुदाय के लोगों के
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 22 पासपोर्ट में से अधिकांश सिख समुदाय के लोगों के हैं। क्राइम ब्रांच की टीम आवेदनकर्ताओं की पहचान करेगी और दलालों की बाबत पूछताछ करेगी। इन लोगों का फर्जी पते और आईडी पर पासपोर्ट बनवाने का क्या उद्देश्य था, इसकी जानकारी भी आवेदनकर्ताओं से ली जाएगी।