शहर को नो पावर कट जोन में शामिल तो कर लिया गया, लेकिन 24 घंटे बिजली सप्लाई का दावा सच नहीं हो रहा। गाजियाबाद की कालोनियों में अभी भी एक-दो घंटे नहीं 7-8 घंटे की बिजली कटौती की जा रही है। पावर कारपोरेशन का तकनीकी ढांचा अभी भी कमजोर है।
यही वजह है कि आंधी-बारिश आते ही सब-स्टेशनों और लाइनों में फाल्ट आ जाते हैं और कालोनियों में बिजली गुल हो जाती है। तारों को अंडरग्राउंड कर इन दिक्कतों से निपटा जा सकता है, लेकिन गाजियाबाद में 11 हजार या इससे कम क्षमता की लाइनों को अंडरग्राउंड करने के लिए जगह नहीं है।
ऐसे में अब जब-जब आंधी-बारिश आएगी तो समझो बिजली भी जाएगी। पावर कारपोरेशन ने गाजियाबाद में 33 केवी की अधिकांश लाइनों को तो अंडरग्राउंड कर दिया है, लेकिन इससे कम क्षमता वाली लाइनों को भूमिगत नहीं किया गया है।
कारपोरेशन के अधिकारियों की मानें तो इन्हें भूमिगत करने के लिए जगह नहीं बची है। सड़कों के दोनों ओर सीवर, पानी, गैस की लाइनें और फोन व इंटरनेट की लाइनें बिछी हुई है।
छोटी लाइनों को भूमिगत किया गया तो ओवर हेड लाइनों की अपेक्षा इनमें फाल्ट तलाशना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में 33 केवी से कम की लाइनों को फिलहाल भूमिगत नहीं किया जाएगा।
दो दिन आंधी-बारिश ने उजागर कर दी हकीकत
शहर में बीते सप्ताह दो दिन आंधी-बारिश आई तो बिजली संसाधनों की हकीकत भी उजागर हो गई। नेहरू नगर, वसुंधरा, लाइन पार, शास्त्री नगर, अवंतिका, चिरंजीव विहार समेत अधिकांश कालोनियां अंधेरे में डूब गई थी।
अधिकारी बोले
फिलहाल कम क्षमता वाली विद्युत लाइनों को अंडरग्राउंड नहीं किया जा रहा। भविष्य में सिर्फ उन क्षेत्रों में इन लाइनों को अंडरग्राउंड किया जा सकता है जहां बिजली चोरी ज्यादा है। ओवरहेड वायर में फाल्ट तलाशना आसान होता है। ऐसे में तार अंडरग्राउंड हुए तो फाल्ट तलाशने में ही कई घंटे लग जाएंगे। - अरविंद राजवेदी, चीफ इंजीनियर पावर कारपोरेशन