गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक रूप देते हुए अब एंडोस्कोपी तकनीक से कान, नाक व गले के ऑपरेशन शुरू कर दिए गए हैं। इस सुविधा के शुरू होने से जिले और आसपास के मरीजों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।
पहले जिन जटिल ऑपरेशनों के लिए बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता था, अब वे जिला अस्पताल में ही हो सकेंगे। एंडोस्कोपी तकनीक से ऑपरेशन छोटे चीरे के जरिये किए जाते हैं। इससे दर्द कम होता है, खून कम बहता है और मरीज जल्दी स्वस्थ होकर घर लौट सकते हैं।
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. चंद्र मोहन शेखर ने बताया कि अस्पताल में दूरबीन की मदद से गले की विस्तृत जांच भी शुरू कर दी गई है। इसके जरिये गले में सूजन, गांठ या अन्य असामान्य स्थितियों का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाया जा सकता है। पहले ऐसी जांच के लिए मरीजों को बड़े चिकित्सा संस्थानों में जाना पड़ता था। इससे समय और धन दोनों की अधिक खपत होती थी। अब यह सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से मरीजों को किफायती और समयबद्ध इलाज मिल सकेगा।
डॉ. शेखर ने बताया कि कई ऑपरेशनों में बड़ा चीरा लगाना अनिवार्य होता था। इससे मरीज को अधिक पीड़ा झेलनी पड़ती थी। स्वस्थ होने में भी अधिक समय लगता था। अब एंडोस्कोप की सहायता से प्रभावित हिस्से को स्क्रीन पर स्पष्ट देखा जा सकता है। इससे रोग की स्थिति का सटीक आकलन होता है और ऑपरेशन अधिक सुरक्षित तरीके से किया जाता है। इस तकनीक से आसपास के स्वस्थ ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है। संक्रमण की संभावना भी घट जाती है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में प्रतिमाह लगभग 15 से 20 मेजर ऑपरेशन और 50 से अधिक माइनर ऑपरेशन किए जाते हैं। एंडोस्कोपी तकनीक से कान के पर्दे का ऑपरेशन, कान की हड्डी बढ़ने की समस्या, नाक में मांस बढ़ना व हड्डी गलने जैसे जटिल मामलों का उपचार अब आसानी से किया जा सकेगा।