डीएमआरसी ने जीडीए को पत्र लिखकर दिलशाद गार्डन टू नया बस अड्डा प्रोजेक्ट में धन की आवश्यकता का हवाला देते हुए 1400 करोड़ में से शेष बची राशि मांगी है। दूसरी तरफ जीडीए अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल कोई राशि देने के लिए जीडीए के पास फंड का संकट है।
डीएमआरसी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि 2210 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में पिछले दो वर्षों में जीडीए के 1400 करोड़ के अंशदान में से मात्र 590 करोड़ ही मिला है। इन दिनों डीएमआरसी को धन की आवश्यकता है। विभिन्न मदों में भुगतान अटका पड़ा है। भुगतान अटकने से प्रोजेक्ट को रफ्तार नहीं मिल पाती है।
इस रूट पर मेट्रो को दौड़ाने का लक्ष्य पहले जून 2017 रखा गया था, जिसे बढ़ाकर दिसंबर 2017 तय किया गया। अपनी साख को बनाए रखने के लिए डीएमआरसी चाहता है कि दिसंबर से डेट आगे न बढे़ लेकिन इसके लिए समय से धन अपेक्षित है। उन्होंने बताया कि इस बाबत शीघ्र शेष बची राशि आवंटित करने के लिए जीडीए को पत्र लिखा गया है।
दूसरी तरफ जीडीए के फाइनेंस कंट्रोलर टीआर यादव ने बताया कि अभी उन्हें ऐसा कोई पत्र डीएमआरसी की तरफ से नहीं मिला है। वैसे उन्हें मालूम है कि इस प्रोजेक्ट में धन की जरूरत है लेकिन फंड के संकट के चलते फिलहाल कोई राशि जारी करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में डीएमआरसी को धन देने की व्यवस्था की जाएगी।
वहीं चीफ इंजीनियर एससी द्विवेदी ने कहा कि डीएमआरसी को 50 करोड़ की राशि जारी की जाएगी लेकिन इसमें अभी देर लगेगी। काफी देर से मिल रहा धन प्रोजेक्ट मैनेजर ने कहा कि जो राशि एक महीने पहले मिली है, यह चार महीने पहले मिलनी चाहिए थी। जीडीए अपने हिस्से की राशि को काफी विलंब से किश्तों में दे रहा है।
उधर, डीएमआरसी सूत्रों ने बताया कि नई सरकार के गठन के बाद केंद्र सरकार के हिस्से की 20 प्रतिशत की राशि मिलने की संभावना प्रबल हुई है। यह राशि प्रदेश सरकार की कैबिनेट के निर्णय के बाद मिलेगी। प्रोजेक्ट के संशोधित बजट के चलते यह मामला कैबिनेट में लंबित है।
अर्थला स्टेशन के लिए 64 पेड़ काटने को नहीं मिली अनुमति डीएमआरसी को अर्थला स्टेशन के लिए 64 पेड़ काटने को अनुमति अब तक वन विभाग से नहीं मिली है। करीब एक महीने पहले डीएमआरसी ने यह अनुमति मांगी थी। वहीं जिला वन विभाग अधिकारी ने बताया कि पत्र मिलने के बाद एनओसी देने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
विभाग की कोशिश होगी कि एनओसी जल्द दे दी जाए।