गाजियाबाद। पीएम की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को प्राइवेट स्कूल प्रबंधन अंगूठा दिखा रहे हैं। छात्रा वैभवी को उसके मनपसंद विषय और स्कूल में केवल इसलिए दाखिला नहीं मिल सका, क्योंकि वह फिजिकल हैंडीकैप है। यही नहीं स्कूल प्रबंधन ने इस संबंध में राज्यमंत्री के निर्देश को भी स्कूल प्रबंधन ने ठेंगा दिखा दिया।
सिल्वर लाइन स्कूल की पूर्व छात्रा वैभवी अपने पैरेंट्स के साथ इस मामले की शिकायत राज्य मंत्री अतुल गर्ग से शुक्रवार को की। अभिभावकों ने राज्यमंत्री को बताया कि उनकी बेटी ने ग्यारवीं कक्षा में दाखिला के लिए डीपीएसजी द्वारा कराई गई लिखित परीक्षा पास कर चुकी है।
इसके बाद अभिभावकों ने इंटरव्यू के दौरान स्कूल प्रबंधन को बेटी के दिव्यांग होने की बात बताई। अभिभावकों का आरोप है कि बेटी के दिव्यांग होने की बात सुनने के बाद से ही स्कूल प्रबंधन दाखिले के लिए इंकार करने लगा।
इसके लिए उसने छात्रा का क्राइटेरिया ठीक न होने का बहाना लगा दिया। पैरेंट्स ने जब क्राइटेरिया की जानकारी ली तो वह भी ठीक निकला। इसके बाद से स्कूल प्रबंधन न तो अभिभावकों से मिल रहे हैं और न ही उनका फोन उठा रहे हैं।
छात्रा व उसके अभिभावक खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री अतुल गर्ग के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। अभिभावकों का कहना है कि वे लोग स्कूल की फीस देने को तैयार है और जो भी खर्चे हैं वह भी देने को राजी हैं, बावजूद उनकी बच्ची को वहां दाखिला नहीं मिल रहा।
इस पर राज्य मंत्री ने स्कूल की प्रिंसिपल को फोन मिलाकर इस मामले में उनसे बात करनी चाही। जबकि स्कूल प्रिंसिपल ने इस मामले में कोई भी बात न करने की बात कहते हुए फोन काट दिया। राज्य मंत्री अतुल गर्ग ने बताया कि वे इस मामले की शिकायत सीएम से करेंगे।
न केवल डीपीएसजी बल्कि प्रत्येक विद्यालय में दिव्यांग बच्चों के लिए कोटा भी निर्धारित कराया जाएगा। दूसरी ओर स्कूल प्रिंसिपल ज्योति गुप्ता से जब मामले की जानकारी ली गई तो उन्होंने इस मामले में कोई भी बात करने से इंकार कर दिया।
स्कूल के खिलाफ होगी कार्रवाई
जिला विकलांगजन कल्याण अधिकारी संगीता सिंह ने बताया कि इस मामले की शिकायत राज्य मंत्री ने उनसे की थी, वे भी अभिभावकों की शिकायत का इंतजार कर रही हैं। अभिभावकों से मिलने के बाद स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोई भी विद्यालय इस तरह दिव्यांग होने की वजह से बच्चे का दाखिला करने से इंकार नहीं कर सकता, शिक्षण संस्थान में इस तरह के बच्चों की जिम्मेदारी से दूर नहीं भागा जा सकता। इससे ऐसे बच्चों को मनोबल टूटेगा। जल्द ही डीएम केमाध्यम से स्कूल को नोटिस जारी किया जाएगा।