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‘डीपीएसजी ने जानबूझ कर नहीं दिया दिव्यांग छात्रा को दाखिला’

Tue, 09 May 2017 11:25 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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cbse - फोटो : cbse
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प्रवेश परीक्षा में पास होने के  बावजूद दिव्यांग छात्रा वैभवी को दाखिला नहीं देने के मामले में डीपीएसजी की मनमानी सामने आ गई है। जिला प्रशासन ने जांच में पता चला है कि स्कूल ने जानबूझ कर वैभवी को दाखिला नहीं दिया था। एडीएम फाइनेंस ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है।
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डीएम ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है और अब स्कूल पर कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है।डीएम को सौंपी गई रिपोर्ट में एडीएम ने कहा है कि डीपीएसजी, मेरठ रोड प्रबंधन ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर दिव्यांग छात्रा वैभवी सिंह को प्रवेश देने से इंकार कर दिया।

वैभवी को प्रवेश नहीं देकर डीपीएसजी ने सीबीएसई बायलॉज के साथ ही अन्य दो एक्ट का उल्लंघन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल प्रिंसिपल का यह रवैया दिव्यांगों के प्रति संवेदनहीनता, उदासीनता, अमानवीयता और जानबूझकर दाखिला नहीं देना प्रदर्शित करता है।
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प्रशासन के नोटिस का स्कूल प्रबंधन द्वारा दिया गया जवाब भी संतोषजनक नहीं है। स्कूल से पूछे गए सवाल के जवाब में प्रिंसिपल द्वारा न तो स्कूल में अध्ययनरत बच्चों की संख्या बताई और न ही यह बताया कि स्कूल में कितने प्रतिशत दिव्यांग बच्चे पढ़ रहे हैं।

एडीएम फाइनेंस राजेश सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट के साथ ही शिकायत की कॉपी और स्कूल की ओर से आए जवाब की कॉपी अटैच कर डीएम को सौंपी है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। शासन से जो भी आदेश आएगा, उसके आधार पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

इस संबंध में जब डीपीएसजी की प्रिंसिपल ज्योति गुप्ता से बात करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल बंद मिला। स्कूल के मीडिया प्रभारी ने बताया कि प्रिंसिपल विदेश में हैं।

इन नियमों का किया उल्लंघन
- सीबीएसई के बायलॉज-जे फैशिलिटी फॉर फिजिकल चैलेंज्ड के तहत सीबीएसई ने स्पष्ट किया हुआ कि सभी स्कूल दिव्यांग बच्चों के दाखिले को प्रोत्साहित करेंगे।
- पीडब्ल्यूडी एक्ट 1995 में तय किया गया है कि दिव्यांग बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का प्रावधान है।

कोई भी विद्यालय दिव्यांग होने की वजह से उसके  दाखिले के लिए इंकार नहीं कर सकता। आरटीई एक्ट 2009 के तहत भी फिजिकल हैंडिकैप बच्चों को सामान्य स्कूलों में दाखिला देना और उसे विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात है।

यहां तक कि इस एक्ट के तहत भी फीस न भर पाने की स्थिति में स्कूलों को ऐसे बच्चों को मुफ्त शिक्षित करने का नियम है।

आरटीआई के जरिए मां को मिली जांच रिपोर्ट
प्रशासन की जांच रिपोर्ट पाने के लिए दिव्यांग छात्रा की मां रानिता सिंह ने आरटीआई लगाई थी, जिसके जरिए उन्हें जांच रिपोर्ट मिली। रनिता सिंह ने बताया वह खुद भी इस जांच रिपोर्ट के साथ सीएम आदित्यनाथ योगी से मुलाकात करेंगी।
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