वासंतिक नवरात्र आठ अप्रैल से शुरू हो रहा है। इस बार माता डोली पर सवार होकर आएंगी। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस बार मां अंबे के डोला पर आने से महामारी और प्राकृतिक आपदा के प्रकोप होगा। पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि नवरात्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है और तृतीया तिथि का क्षय होने के कारण इस बार नवरात्र आठ दिनों का ही होगा।
नवरात्र में घट स्थापन मुहूर्त अति महत्वपूर्ण होता है। इस बार घट स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रात: 7.58 से लेकर 9.54 बजे तक रहेगा। कलश स्थापना वृष लग्न में होगी। पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि इस समय लाभ का चौघड़िया भी रहेगा इसलिए यह मुहूर्त अति शुभ रहेगा। नवरात्र पूजन करने वाले व्यक्ति को एक दिन पूर्व से ही तैयारी प्रारंभ कर देनी चाहिए।
एक दिन पहले शाम से ही मां दुर्गा का स्मरण करते हुए उपवास प्रारंभ कर देना चाहिए। अगले दिन नवरात्र प्रतिपदा पर सूर्योदय से पूर्व ही स्नान आदि से निपटकर घट स्थापन करनी चाहिए। हथेली में फूल, जल, सिक्का, रखकर अपनी मनोकामना बोलते दुर्गा पूजन का संकल्प लेना चाहिए।
नवरात्र की पूजन विधि
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार नवरात्र के पहले दिन घर के ईशान कोण में हरी पत्तियों से ढका घट पवित्र जल से भरकर स्थापित करना चाहिए। पंडित गिरीश मिश्र ने बताया कि मां दुर्गा की पूजा कमल के फूल, फलों, हवन सामग्री, धूप और घी के दिये से करें।
दुर्गा का शाकुंभरी रूप वनस्पति की देवी का है। अत: प्रतिपदा को लोग जौ बोते हैं। इसी तरह अष्टमी को कन्या पूजन तथा नवमी को ज्ञान, कला और शिक्षा की देवी सरस्वती की अराधना की जाती है।