नगर निगम अफसरों ने शहर में वाटर सप्लाई का सिस्टम ही बदल दिया। नई वाटर सप्लाई स्कीम में करोड़ों की लागत से ओवरहेड टैंक बनाए गए और बेकार छोड़ दिए गए। लोगों को वर्षों से इंतजार है कि कब इनमें पानी आए।
अफसर हैं कि टंकियों को चालू कराना तो दूर इनके इस्तेमाल की प्लानिंग नहीं कर रहे। नंदग्राम, नेहरू नगर, कविनगर, प्रताप विहार, विजयनगर सभी जगह हाल एक ही जैसा है। पानी के टैंक सिर्फ इस बात का सिंबल बने खड़े हैं कि शहर में सभी सुविधाएं हैं। जबकि वाटर सप्लाई की बदतर है।
1.20 करोड़ की टंकी को 17 साल से पानी का इंतजार
नगर निगम ने नेहरू नगर थर्ड में वर्ष 1999 में 1.20 करोड़ की लागत से ओवरहेड टैंक का निर्माण जल निगम से कराया था। यह टैंक बनाने के बाद नगर निगम को हैंडओवर कर दिया गया, लेकिन 17 साल बीत जाने के बाद भी इसमें पानी नहीं पहुंचा।
स्थानीय पार्षद शेखर त्यागी तीन साल से इस टैंक को चालू करने की मांग कर रहे हैं, निगम अफसर हैं कि सुनते ही नहीं। महापौर के हस्तक्षेप के बावजूद टैंक में पानी नहीं पहुंचा।
पानी भरते ही झुक जाती हैं नंदग्राम की दो टंकी
नंदग्राम में नगर निगम के दो ओवरहेड टैंक में पानी नहीं भरा जा रहा। यह टंकियां पानी भरते ही हिलने लगती हैं और एक-दूसरे की तरफ झुक जाती हैं। खराब इंजीनियरिंग का नमूना कहें या घटिया निर्माण सामग्री का परिणाम, खतरनाक हो चुकी इन टंकियों में अब वर्षों से पानी नहीं भरा जा रहा। निगम ने दोनों टंकियों के बीच लोहे की सपोर्ट भी दी, ताकि यह झुके नहीं। यह प्रयोग भी असफल रहा।
टेढ़ी हुई कविनगर की टंकी
कविनगर डी ब्लाक स्थित निगम स्टोर परिसर में बनी पानी की टंकी दो साल से खराब है। टेढ़ी हो जाने के कारण इसमें पानी नहीं भरा जा रहा। स्थानीय पार्षद मोनिका मित्तल ने कई बार निगम अधिकारियों को शिकायत देकर इसे गिराने और नई टंकी बनाने की मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसी परिसर में बनी दूसरी छोटी टंकी वर्षों से चालू नहीं है। पार्षद का कहना है कि निगम अफसर चाहें तो मरम्मत कराकर फिलहाल छोटी टंकी को चालू करा सकते हैं।
यहां भी टंकियां बनीं शोपीस
प्रताप विहार, राहुल विहार, लाजपतनगर, राजेंद्र नगर, गोविंदपुरम, गांधी नगर, पटेल नगर
टैंक बंद होने से परेशानी
ओवरहेड टैंक बंद होने की वजह से अब शहर में ट्यूबवेलों से डायरेक्ट पानी सप्लाई किया जा रहा है। इससे घरों में पानी का प्रेशर कम मिलने से ऊपरी मंजिलों पर पानी नहीं पहुंच पाता। पावर कट के दौरान पानी की सप्लाई भी बंद हो जाती है। ओवरहेड टैंक से पावर कट के दौरान भी पानी की सप्लाई की जा सकती है।
टेस्टिंग से पहले ही किया भुगतान, फेल हुआ नलकूप
करीब दो लाख की लागत से नेहरू नगर थर्ड में लगाया गया नलकूप एक साल में ही फेल हो गया। पानी की किल्लत को लेकर पार्षद के धरने के बाद निगम अफसरों ने बीते साल यह ट्यूबवेल लगाया था। तभी से यह बंद हैं। टेस्टिंग से पहले ही निगम अफसरों ने ठेकेदार को इसका भुगतान भी कर दिया।
अब पार्षद ने इसे चालू कर पानी सप्लाई देने की मांग की तो अफसरों ने हाथ खड़े कर दिए। निगम अफसरों के मुताबिक नलकूप में अब पाइप की लंबाई बढ़ाई जाएगी, इसके बाद ही चालू हो सकेगा।
पार्षद शेखर त्यागी ने जलकल विभाग के अफसरों पर ठेकेदारों से साठगांठ का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनकी संस्तुति और ट्यूबवेल की टेस्टिंग के बिना ठेकेदारों को भुगतान कर अफसरों ने आर्थिक अनियमितता की है।
उनका कहना है कि इसकी रकम अफसरों के वेतन से वसूल किया जाए। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री से की जाएगी। उन्होंने कहा कि बुधवार तक नलकूप चालू नहीं हुआ तो वह ट्यूबवेल के पास ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।
ट्यूबवेल का रिकार्ड रजिस्टर में होगा दर्ज
गाजियाबाद। अब ट्यूबवेल की मोटरों की रिपेयरिंग कागजों में नहीं हो सकेगी। मोटर फुंकी तो बाइडिंग करने वाले कांट्रेक्टर को पुराना सामान स्टोर में जमा कराना होगा। प्रत्येक मोटर पर नंबरिंग कर उसका रजिस्टर में ब्यौरा दर्ज किया जाएगा।
ऐसे में अब एक ही मोटर को बार-बार फुंका दर्शाकर बिलों का भुगतान नहीं कराया जा सकेगा। निगम अधिकारियों ने पुराना सामान जमा कराने की शर्त तय कर दी है।
नेहरू नगर के ट्यूबवेल में पाइप डालकर जल्द ही उसे चालू कराया जाएगा। इसके बाद टंकी में पानी पहुंच पाएगा। अन्य क्षेत्रों में खराब टंकियों का सर्वे कराकर उन्हें चालू करने के प्रयास किए जाएंगे। उनमें जरूरी मरम्मत भी कराई जाएगी। - आरके यादव, अधिशासी अभियंता, जलकल