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मार्शल आर्ट शिक्षक से अपराधी बना सलीम वास्तिक: पहचान छिपाकर रह रहा यूट्यूबर गिरफ्तार, अपहरण और हत्या का आरोपी

Sat, 25 Apr 2026 01:36 PM IST
Digvijay Singh माई सिटी रिपोर्टर, साहिबाबाद( गाजियाबाद)

सार

यट्यूबर सलीम वास्तिक ने वर्ष 1995 में एक 13 वर्षीय किशोर संदीप बंसल का अपहरण कर हत्या की थी। दिल्ली कड़कड़डूमा कोर्ट ने मामले में सलीम वास्तिक और उसके साथी अनिल कुमार को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यूट्यूबर ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की लेकिन वर्ष 2000 में अंतरिम जमानत पर जेल से छूटने के बाद फरार हो गया।
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सलीम वास्तिक गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूट्यूब चैनल शुरू करने के बाद इस्माम धर्म और उसकी रूढ़िवादी प्रथाओं व कुरीतियों के खिलाफ वीडियो पोस्ट करने वाले यूट्यूबर सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्तिक को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। 27 फरवरी 2026 को लोनी स्थित कार्यालय में यूट्यूबर पर जानलेवा हमला हुआ था। इसके बाद से वह चर्चा में आया था। वह लोनी में पिछले 26 वर्षों से पहचान छिपाकर रह रहा था। स्थानीय पुलिस को भी इसकी जानकारी नहीं थी।

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एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि 24 अप्रैल की रात दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम सलीम वास्तिक के घर पहुंची थी। लोनी थाने में आमद भी कराई थी। जांच में पता चला कि यट्यूबर सलीम वास्तिक ने वर्ष 1995 में एक 13 वर्षीय किशोर संदीप बंसल का अपहरण कर हत्या की थी। दिल्ली कड़कड़डूमा कोर्ट ने मामले में सलीम वास्तिक और उसके साथी अनिल कुमार को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यूट्यूबर ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की लेकिन वर्ष 2000 में अंतरिम जमानत पर जेल से छूटने के बाद फरार हो गया। इसके बाद उसने अपनी पहचान बदली और पंजाब, हरियाणा और अंबाला में छिपा रहा। यहां तक कि पुलिस रिकॉर्ड में सलीम मृत घोषित हो चुका है। फरवरी 2026 के बाद चर्चा में आए सलीम वास्तिक को जब क्राइम ब्रांच की टीम ने पहचाना तब एक बार फिर उसके पुराने अपराध की परतें खुलती चली गईं। एसीपी ने बताया कि क्राइम ब्रांच के अनुसार सलीम वास्तिक को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।

वर्ष 2010 से लोनी में बसा 
वर्ष 2010 में वह गाजियाबाद के लोनी में स्थायी रूप से बस गया। यहां उसने सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद के नाम से नई पहचान बनाई। नसबंदी कॉलोनी में महिलाओं के कपड़ों और अन्य सामानों की एक दुकान खोली। इसके बाद जैकेट आयात-निर्यात व्यापार भी शुरू किया। कुछ समय पहले उसने अपना सलीम वास्तविक एक्स मुस्लिम नाम से यूट्यूब चैनल भी शुरू किया। धार्मिक रूढ़िवादिता और कट्टरता के खिलाफ कई पॉडकास्ट किए। यहां तक कि इस्लाम के खिलाफ मुहीम तक चलाई।
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हमले के बाद से चर्चा में आया यूट्यूबर सलीम वास्तविक
सलीम वास्तविक ने यूट्यूब चैनल शुरू करने के बाद इस्माम धर्म और उसकी रूढ़िवादी प्रथाओं व कुरीतियों के खिलाफ कई वीडियो अपने चैनल पर प्रसारित किए। पहलगाम हमले का विरोध और ऑपरेशन सिंदूर की सराहना भी की। इसके बाद 27 फरवरी 2026 को लोनी स्थित उसके कार्यालय पर जीशान और गुलफाम नामक दो व्यक्तियों ने चाकू से जानलेवा हमला किया और गर्दन व पेट पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए। इसके बाद से ही सलीम वास्तविक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नाम बन गया। 1 मार्च 2026 को पहली मुठभेड़ में, यूपी एसटीएफ और गाजियाबाद पुलिस ने मुख्य आरोपी जीशान को लोनी में हुई मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया। वहीं 3 मार्च 2026 को दूसरा आरोपी गुलफाम इंदिरापुरम के वसुंधरा इलाके में मुठभेड़ के दौरान मारा गया। कुछ दिन पहले ही यूट्यूबर सलीम वास्तविक को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था।

मार्शल आर्ट शिक्षक से अपराधी बना, गुमनाम होकर देता रहा चकमा 
शामली के नानूपुरा के मूल निवासी सलीम खान की शादी क्षेत्र की रहने वाली अफसाना से हुई। दोनों के एक बेटा और बेटी हैं। मुजफ्फर नगर जिले में संचालित शाओलिन कुंग फू केंद्र में मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लिया। रोजगार की तलाश में वह परिवार के साथ दिल्ली आ गया। यहां उन्होंने दिल्ली के दरियागंज स्थित निजी स्कूल में मार्शल आर्ट प्रशिक्षक के पद पर नौकरी की। इसके बाद उन्होंने मुस्तफाबाद से दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में जैकेट की आपूर्ति का व्यवसाय भी शुरू किया। तभी उसका संपर्क अनिल कुमार से हुआ था। उसने ही सलीम खान को एक अमीर परिवार से बच्चे का अपहरण करके फिरौती मांगने का सुझाव दिया।

20 जनवरी 1995 को सलीम खान ने दिल्ली के गोकुलपुरी निवासी संदीप बंसल (13) का अपहरण किया। इसके बाद उसके पिता को फोन करके 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी और फिर मौत के घाट उतार दिया। अनिल ने 4 फरवरी 1995 को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस सलीम को भी गिरफ्तार कर चुकी थी। वर्ष 1997 में उसे दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वर्ष 2000 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसे अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया। जेल से छूटने के बाद वह फरार हो गया और पहचान बदलकर चकमा देता रहा।

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