इंदिरापुरम। थाना पुलिस ने वित्तीय धोखाधड़ी के बडे़ मामले में पुलिस ने सोमवार रात दिल्ली के कारोबारी विमल जैन को गिरफ्तार किया है। उस पर एक नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनी से 7.60 करोड़ रुपये का लोन लेकर गबन का आरोप है। आरोपी ने लोन तो लिया, लेकिन किस्तें नहीं चुकाईं और फर्जी बिल भी कंपनी को भेजे गए।
एसीपी सूर्यबली मौर्य ने बताया कि एलिगेंस कैपिटल सर्विसेस के निदेशक आयुष गोयल ने इंदिरापुरम थाने में शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पीतमपुरा मौर्य एन्क्लेव निवासी विमल जैन ने उनकी कंपनी से 7.60 करोड़ रुपये का लोन लिया था, लेकिन किस्तों का भुगतान नहीं किया। जांच में पता चला कि विमल जैन ने फर्जी टैक्स इन्वॉइस बनाए थे। उसने अपनी कंपनी के नाम पर फर्जी डायमंड बेचने के बिल काटे थे। विमल जैन ने दावा किया कि उसने 7.60 करोड़ रुपये के कच्चे हीरे की आपूर्ति की है और लोन की राशि इन हीरे के बदले समायोजित कर ली गई है। कंपनी की जांच में ये बिल फर्जी पाए गए।
धोखाधड़ी का तरीका
विमल जैन ने एलिगेंस कैपिटल सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड को कच्चे हीरे भेजने का दावा किया। उसने साथ में कंपनी का टैक्स इन्वॉइस भी भेजा था। आरोपी ने कहा कि उसने इन हीरों के बदले 7.60 करोड़ रुपये का कर्ज चुका दिया है। उसने यह भी दावा किया कि अब कोई बकाया राशि नहीं बची है। पुलिस पूछताछ में विमल जैन ने बताया कि उसने प्रॉपर्टी के बदले एक बैंक से भी लगभग नौ करोड़ रुपये का लोन लिया था। उसे चुकाने के लिए आयुष की कंपनी से लोन लिया था। इसके बाद आयुष की कंपनी से एक कानूनी नोटिस भेजा गया था। फिर 26 जून को रिपोर्ट दर्ज की गई।
ईडी की जांच और संपत्ति अटैचमेंट
पुलिस ने बताया कि विमल जैन के खिलाफ ईओडब्ल्यू (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) में भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। उसने अपने भाई नरेश जैन के साथ मिलकर फर्जी कंपनियां बनाकर बी पार्टी से लेन-देन कर करोड़ों की कर चोरी की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इसकी जांच कर रहा था और वर्ष 2020 में ईडी ने उसे गिरफ्तार किया था। ईडी ने आरोपी की सभी प्रॉपर्टी भी अटैच कर रखी है।