परमानेंट डीएल बनवाने के लिए आवेदकों को वर्चुअल कंप्यूटर टेस्ट देना होगा। इसके लिए शासन स्तर से प्रक्रिया शुरू हो गई है। शासन ने गाजियाबाद के लिए 50 लाख रुपये का बजट रिलीज किया है। इस बजट से आरटीओ में एक कमरा तैयार किया जाएगा, जहां आधुनिक मशीनें होंगी, जिनमें बैठकर आवेदक ड्राइविंग टेस्ट देगा।
प्रदेश में फिलहाल गाजियाबाद और नोएडा में ही यह व्यवस्था की जा रही है।इसमें आवेदक एक कंप्यूटराइज्ड इंस्ट्रूूमेंटेल मशीन में बैठकर टेस्ट देगा। जिस प्रकार रोड पर बैरियर या घुमावदार रास्ते बनाकर टेस्ट होता है, वैसा ही ट्रैक मशीन पर होगा।
परिवहन विभाग परमानेंट डीएल टेस्ट के लिए जगह की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने जा रहा है। एआरटीओ (प्रशासन) विश्वजीत सिंह ने बताया कि राइडिंग टेस्ट के लिए अब विभाग हाईटेक तरीका अपनाएगा। आवेदक जब परमानेंट डीएल बनाने के लिए आएगा तो उसका ड्राइविंग टेस्ट कंप्यूटर के माध्यम से लिया जाएगा।
एक रूम तैयार किया जाएगा, जिसमें मशीनें लगी होंगी। आवेदक मशीन में बैठेगा, जिस प्रकार वह वाहन में बैठता है। फिर कंप्यूटर स्क्रीन पर जो पिक्चर, गड्ढे, घुमावदार रोड, वाहन को आगे-पीछे करना यह सब वह बैठे-बैठे करेगा। आवेदक टेस्ट में फेल हुआ या पास यह मशीन ही निर्धारित करेगी।