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दूध कारोबारी को गोलियों से भूना

Sat, 03 Sep 2016 12:24 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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अपराध - फोटो : अमर उजाला
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भोपुरा रोड पर शालीमार गार्डन कट के पास बाइक सवार दो बदमाशों ने पसौंडा के दूध कारोबारी की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। सरेशाम हुई इस वारदात से हड़कंप मच गया। परिजनों ने कपड़ा कारोबारी अर्शी के हत्यारे 50 हजार के इनामी यूनुस उर्फ काले और उसके भाइयों पर हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस को मुखबिरी के शक में हत्या का अंदेशा है।
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पसौंडा में चांद मस्जिद के पास रहने वाले जाकिर (55) कालोनी में ही दूध की डेयरी चलाते थे। शुक्रवार शाम करीब साढ़े पांच बजे वह बाइक पर दुर्गापुरी दिल्ली स्थित एक डेयरी पर दूध सप्लाई करने जा रहे थे। शालीमार गार्डन कट स्थित फार्म हाउस के सामने लाल बाइक सवार दो बदमाशों ने जाकिर को ओवरटेक कर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।

जाकिर सड़क पर गिर गए तो बदमाश दिल्ली की ओर भाग गए। आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी और जाकिर को दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जाकिर के शरीर पर नौ गोलियां लगी थीं।
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एसएसपी, एसपी सिटी, एएसपी साहिबाबाद पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और छानबीन की। घटनास्थल से 11 खोखे मिले हैं। पुलिस का मानना है कि दोनों बदमाशों ने पिस्टल से फायरिंग करते हुए दोनों मैगजीन की पिस्टल खाली कर दी होगी। एएसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि परिजनों ने की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है।

मुखबिरी के शक में गई जाकिर की जान!
डेढ़ साल, सरेराह तीन हत्याएं और पुलिस का एक जवाब, तलाश जारी है। पहले कपड़ा कारोबारी अर्शी, फिर उसका भाई अमजद और अब जाकिर। तीनों हत्याएं एक ही कड़ी से जुड़ती दिखाई दे रही हैं। दरअसल, वर्ष 1998 में काले ने जाकिर के ससुर फिरोज की हत्या की थी। जाकिर ने केस की पैरवी की और काले को उम्रकैद हुई। इसके बाद से काले जाकिर को दुश्मन मानता था।

पुलिस के अनुसार पिछले दिनों इंदिरापुरम के एनकाउंटर में अपने भाई नवाब के पकड़े जाने के पीछे भी काले जाकिर को ही जिम्मेदार मान रहा था।हत्या का यह सिलसिला साल 1998 से शुरू हुआ था। काले ने जाकिर के ससुर और पसौंडा निवासी फिरोज की उनके घर के बाहर सरियों से पीटकर हत्या कर दी थी। मामले में काले को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

कोर्ट से जमानत पर आने के बाद काले ने जाकिर को धमकी दी थी कि वह उम्रकैद का बदला हत्या से लेगा। जाकिर के बेटे खालिद ने बताया कि नाना की हत्या के बाद उसके पिता ही उनके केस की पैरवी कर रहे थे। इस दौरान लगातार काले और उसके भाई उन्हें धमकी देते थे, जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस से भी की थी। हालांकि गांव के लोगों ने एक बार दोनों परिवारों को साथ बैठाकर समझौता करवा दिया था।

उधर, पुलिस के अनुसार समझौते के बाद भी काले जाकिर को अपना दुश्मन मानता था। जब पुलिस ने अर्शी की हत्या के बाद इंदिरापुरम में काले का पीछा करते हुए एनकाउंटर में उसके भाई नवाब और साथियों को धर दबोचा तो काले को मुखबिरी का शक जाकिर पर गया होगा, जिसके बाद उसने जाकिर को निशाना बनाया है। ऐसे में जाकिर की मौत का कारण अर्शी मर्डर केस नजर आ रहा है।

एएसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के बताए हुलिए के अनुसार घटना को अंजाम देने वालों में से एक काले हो सकता है। जल्द ही स्केच बनवाया जाएगा। सीसीटीवी की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जल्द ही बदमाशों को पकड़ लिया जाएगा।


पुलिस न करती लापरवाही तो बच जाती जाकिर की जान
गत 19 जुलाई की रात पुलिस की जरा सी लापरवाही से काले भाग निकला था। दरअसल, मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने चेकिंग की, तो बदमाश भागने लगे। इस दौरान कनावनी पुलिया के पास पुलिस ने यूनुस उर्फ काले के भाई 15 हजार के इनामी नवाब, पांच हजार के इनामी संजय उर्फ धारा और रवि को मुठभेड़ के बाद धर दबोचा था, मगर काले भाग निकला था। पुलिस अगर अधूरा होमवर्क न करते हुए चारों ओर से घेरती तो काले को आसानी से पकड़ा जा सकता था
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