तीन तलाक के विरोध में आवाज उठाने और धर्म परिवर्तन की इच्छुक मुस्लिम महिला के बयान बुधवार को दर्ज नहीं हो सके। घंटों इंतजार के बाद भी जब सिटी मजिस्ट्रेट नहीं आए तो वह वापस चली गई। करीब चार घंटे चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद युवती का साथ दे रहे हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने प्रशासन पर जान बूझकर परेशान करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा है कि अब वह किसी अधिकारी के समक्ष कोई बयान दर्ज नहीं कराएंगे। धर्मांतरण कार्यक्रम भी धूमधाम के साथ आयोजित किया जाएगा।कैला भट्ठा में रहने वाली मुस्लिम महिला रविवार को आर्य समाज मंदिर में धर्मांतरण करने पहुंची थी। उस समय पुलिस-प्रशासन ने यह कहकर कार्यक्रम रुकवा दिया था कि धर्मांतरण से पूर्व महिला को सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने होंगे।
इसी के चलते बुधवार को महिला जय शिव सेना के पदाधिकारियों के साथ सुबह 11 बजे कलक्ट्रेट पहुंची। महिला के आने की सूचना के चलते बड़ी संख्या में पुलिस और एलआईयू के जवान मुस्तैद थे। महिला और उसके साथ आए लोग सीधे सिटी मजिस्ट्रेट बीडी सिंह यादव की कोर्ट में पहुंचे।
पता चला कि सिटी मजिस्ट्रेट प्रोटोकाल ड्यूटी के तहत राज्य सभा सांसद रामगोपाल यादव के कार्यक्रम में इंदिरापुरम गए हैं। करीब दो घंटे बाद सिटी मजिस्ट्रेट वहां से लौटकर आए, मगर अपनी कोर्ट या दफ्तर में आने की बजाए वह सीधे सभागार में चल रही एक बैठक में पहुंच गए। इस दौरान हिंदूवादी संगठन के पदाधिकारियों ने कई बार उनसे फोन पर बात भी की।
करीब ढाई बजे बैठक समाप्त होने पर सिटी मजिस्ट्रेट अपने आवास पर चले गए। इस पर नाराज महिला और उसके साथ आए जय शिव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित आर्यन ने कहा कि प्रशासन उन्हें जान बूझकर गुमराह कर रहा है। वह कानूनी प्रक्रिया के तहत धर्मांतरण करना चाहते थे, मगर प्रशासन शायद ऐसा नहीं चाहता है। यही कारण है कि उन्हें चार घंटे तक परेशान किया गया।
इसके बाद महिला और उसके साथ आए लोग वहां से चले गए।जय शिव सेना के महासचिव ललित चौधरी ने बताया कि उन्हें फोन पर अनजान नंबर से कॉल आई है, जिसमें कहा गया कि इस तरह की हरकतें बंद करो, नहीं तो गोली मार दी जाएगी।जय शिव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित आर्यन का कहना है कि अब धर्म परिवर्तन का कार्यक्रम रोका नहीं जा सकता है।
प्रशासन के रवैये से भी दिख गया कि बयान जरूरी नहीं है। अब एक -दो दिनों में भव्य तरीके से रामलीला मैदान या किसी मंदिर में धर्म परिवर्तन कराया जाएगा।सिटी मजिस्ट्रेट बीडी सिंह यादव का कहना है कि कोई महिला धर्म परिवर्तन मामले में बयान दर्ज कराना चाहती है, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
उनके पास इस संबंध में न तो कोई प्रार्थना पत्र आया है और न ही किसी उच्चाधिकारी या कोर्ट का ऐसा आदेश है। किसी को अगर कोई बयान दर्ज कराना होता है तो पहले प्रार्थना पत्र दिया जाता है। प्रार्थना पत्र के आधार पर ही यह देखा जाएगा कि मामला प्रशासनिक स्तर का है या फिर मजिस्ट्रेट स्तर का।