सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाली मां-बेटी को सीबीआई ने बुधवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई कोर्ट के आदेश पर आरोपियों के मकान को कुर्क करने पहुंची थी। दोनों मौके पर ही मिल गईं। शाम को दोनों को जेएम सीबीआई चेतना सिंह की कोर्ट में पेश किया गया।
जहां से न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया गया।सीबीआई ने यह मामला नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर 23 अगस्त 2013 को दर्ज किया था। सुजान सिंह नेगी नामक एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी कि उमेशवीर विक्रम सिंह, उसकी पत्नी लीना सिंह और बेटी दिव्या सिंह सरकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर लाखों की ठगी कर चुकी हैं।
करीब 21 लोगों से ही परिवार ने 78.95 लाख रुपये ठग लिए थे। जांच के बाद सीबीआई ने 11 जनवरी को जेएम सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। जांच में पाया था कि आरोपी उमेशवीर विक्रम सिंह खुद को कभी आईएएस, आईपीएस अधिकारी तो कभी मंत्री बताकर लोगों को झांसे में लेता था।
कभी वह खुद को इंडियन जस्टिस नामक संस्था से जुड़ा वरिष्ठ अधिवक्ता भी बताता था। वह गाड़ी पर भी लाल-नीली बत्ती लगाकर चलता था।कोर्ट के कई बार वारंट जारी किए जाने के बाद भी आरोपी हाजिर नहीं हो रहे थे तो संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए गए थे। बुधवार को सीबीआई टीम आरोपियों के मकान को कुर्क करने के लिए पहुंची थी।
उस दौरान घर में मां-बेटी लीना सिंह और दिव्या सिंह मौजूद थीं। सीबीआई ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।कोर्ट में पेशी के दौरान सीबीआई के लोक अभियोजक अमजद अली ने कोर्ट को बताया कि आरोपी लीना सिंह और दिव्या सिंह ने सरकारी नौकरी दिलाने के लिए ‘आईपीसीसीएल और नापको’ नामक दो फर्जी कंपनी तैयार की थीं।
इन कंपनियों के नाम के आगे डॉट कॉम गवर्नमेंट लगाकर उसे सरकारी जैसा दिखाया गया और ऑनलाइन आवेदन मंगाए गए थे। इसके लिए प्रति आवेदक से 200 रुपये का बैंक ड्राफ्ट भी लिया गया था। सैकड़ों युवकों से 2 से लेकर 4 लाख रुपये तक यह कहकर ले लिए गए कि उन्हें नौकरी पर लगवा दिया जाएगा। ऐसे में यह मामला करोड़ों की ठगी का बनता है।