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अब नए सिरे से दिए जाएंगे मीट की दुकानों के लाइसेंस

Mon, 27 Mar 2017 11:53 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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मीट की दुकान - फोटो : file photo
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अवैध मीट की दुकानें बंद कराने के साथ ही अब जिला प्रशासन ने दुकानों को लाइसेंस देने के लिए नए मानक तय किए हैं। अब नए मानकों के  आधार पर मीट दुकान संचालकों को लाइसेंस दिया जाएगा।

जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डा. बिजेंद्र त्यागी ने बताया कि मीट विक्रय करने के  लिए ग्राम और नगर क्षेत्र में अलग-अलग विभागों से एनओसी लेनी होगी। मीट की दुकान के लिए नगर क्षेत्र में नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत द्वारा लाइसेंस दिया जाएगा।
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डा. त्यागी ने बताया कि मीट की दुकानों को लाइसेंस देने के लिए पांच विभागीय अधिकारियों की समिति गठित की गई है। सोमवार को कमेटी अधिकारियों की बैठक हुई और लाइसेंस के नए मानकों पर चर्चा की गई है।

एडीएम प्रशासन ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि नगर निगम से मीट की दुकानों की सूची मंगाई तो मालूम हुआ कि दो वर्ष पहले 400 से अधिक दुकानों का पंजीकरण हुआ था। पिछले दो वर्षों से किसी भी दुकानदार ने लाइसेंस का रिन्यूअल नहीं कराया है।
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ऐसे में रिन्यूअल भी अब नए मानकों के आधार पर ही होगा, जिन दुकानों के  पास रिन्यूअल लाइसेंस है, उनकी दुकानें चलती रहेंगी।

मीट की दुकान का लाइसेंस लेने के नए मानक
- धार्मिक स्थल, स्कूल, बैंक्वेट हॉल, सार्वजनिक स्थल और राजकीय संस्थानों के 150 मीटर की परिधि में मीट की दुकान नहीं होनी चाहिए।
- आवेदन कर्ता को मीट विक्रय करने के लिए स्लॉटर हाउस से ही मीट खरीदना होगा।

- लाइसेंस लेते समय मीट कारोबारी को शपथ पत्र देना होगा कि वह एक दिन में कितना मीट खरीदेगा, इसके साथ ही उसका हिसाब भी रखना होगा।
- आवेदनकर्ता के पास मीट के रेफ्रीजरेशन की व्यवस्था होनी चाहिए।

- बड़े और छोटे पशुओं के अलावा मुर्गा आदि का भी मीट यदि वह बेचता है तो मीट विक्रय केंद्र पर उसे मुर्गे की स्लाउटर करने का अधिकार होगा। बशर्ते स्लाउटरिंग एरिया कवर्ड हो और वेस्टेज को सही तरीके से डिस्पोज करने की व्यवस्था हो।

- दुकान पूर्ण रूप से शीशे से कवर्ड होनी चाहिए।
- प्रत्येक माह की 25 तारीख को पशुओं के क्रय और विक्रय की पूरी जानकारी जिला पशु चिकित्सा अधिकारी को देनी होगी।
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