सिहानी गेट थाने की पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने नासिरपुर स्थित शिव मंदिर में 28 अप्रैल की रात हुई महंत नासिक गिरी की हत्या का खुलासा कर दिया है। पुलिस की माने तो मृतक के भतीजे ने खुद मंदिर का महंत बनने के लिए हत्या की साजिश रची।
रुपयों का लालच देकर अपने पांच साथियों को भेजकर महंत की हत्या करवा दी। शक की सूई उसकी ओर न घूमे, इसलिए वह खुद वारदात में शामिल नहीं हुआ। पुलिस ने भतीजे और उसके पांचों साथियों को बहराइच और श्रावस्ती से गिरफ्तार कर लिया है।
वहीं, पुलिस को शक है कि मृतक के गुरु की हत्या में आरोपी एक साधू भी इस वारदात के पीछे हो सकता है। इसकी जांच की जा रही है।एसएसपी हरिनारायण सिंह ने बताया कि महंत नासिक गिरी के भतीजे पप्पू को पुलिस ने फोन कर बहराइच स्थित विश्वेसरगंज से गाजियाबाद बुलवाया गया तो खुद आने के बजाए उसने पिता व भाई को भेज दिया।
इससे पुलिस का शक उस पर बढ़ गया। पुलिस ने पप्पू की कॉल डीटेल्स खंगाली तो एक नंबर घटना के दिन नासिरपुर इलाके में एक्टिव मिला। नंबर दिनेश का था। इस नंबर पर पप्पू से भी बात होती थी। पुलिस ने दिनेश निवासी विश्वेसर गंज बहराइच को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो मामले का खुलासा हो गया।
इसके बाद सभी को धर दबोचा गया। पकड़े गए आरोपियों में मृतक का भतीजा पप्पू राजभर के अलावा अशोक, त्रिभुवन उर्फ मोहन गिरी व दिनेश कुमार निवासी विश्वेसर गंज बइराइच और दीपक व अवधराम निवासी ईकोना जिला श्रावस्ती हैं। दीपक बीए पास है, जबकि बाकी पांचों आरोपी दसवीं फेल हैं।
दिनेश चोरी के मामले में पहले जेल जा चुका है।एसएसपी के मुताबिक पप्पू काफी समय महंत नासिक गिरी के साथ मंदिर में रहा था। उसे पता था कि मंदिर में हर महीने करीब एक लाख रुपये चंदा आता है। वह चाचा को रास्ते से हटाकर खुद महंत बनना चाहता था।
कुछ महीने पहले पप्पू की किसी गलती पर महंत ने उसे थप्पड़ मारकर गांव भेज दिया था। इसके बाद ही उसने दिनेश और अन्य युवकों के साथ मिलकर चाचा की हत्या की साजिश रच डाली। पप्पू ने सभी को बताया था कि महंत के पास करीब 20 लाख रुपये हैं। सभी रुपयों को बराबर बांट लेंगे।
चिल्लाने पर आरोपियों ने दबाया गलापूछताछ में पप्पू ने बताया है कि उसके भेजे पांचों युवक सिर्फ लूट करने गाजियाबाद आए थे। 28 अप्रैल की रात करीब 12:30 बजे पड़ोस के मकान की सीढ़ियों से उसकी छत पर पहुंचे और मंदिर की दीवार फांदकर अंदर दाखिल हुए थे।
कमरे की तलाशी के दौरान महंत की नींद खुल गई और वह चिल्लाने लगे। इसी दौरान मंदिर के पीछे ट्रैक से एक ट्रेन निकल रही थी, जिसकी गूंज से महंत के चिल्लाने की आवाज दब गई।
पकड़े जाने के डर से चार आरोपियों ने महंत का मुंह दबा दिया और पैर बांध दिए। एक आरोपी ने उनके गले पर पैर रख दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। इस पर बिना रुपया लिए ही वे भाग खड़े हुए। आरोपियों का कहना है कि वे महंत की हत्या नहीं करना चाहते थे। हालांकि पुलिस का दावा है कि पप्पू मंदिर के महंत की गद्दी हथियाने के लिए चाचा की हत्या करवाना चाहता था।
-----