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काश! पुलिस पसीज जाती तो प्रियांशी मौत को गले न लगाती

Fri, 29 Jul 2016 12:39 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
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अपराध - फोटो : अमर उजाला
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नौवीं की होनहार छात्रा प्रियांशी की खुदकुशी के गम ने उसके परिवार को तोड़ दिया है। घर में कोहराम मचा है, जिसमें आज तो पुलिस भी शरीक है, मगर बुधवार को जब वह पुलिसकर्मियों से पिता को छोड़ने के लिए गिड़गिड़ा रही थी तो उनका दिल नहीं पसीज रहा था। उसके आंसू और पिता की लाचारी पुलिसकर्मियों को झूठी लग रही थी।
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बृहस्पतिवार सुबह करीब पांच बजे प्रियांशी की मां रानी तोमर बेटे सुदक्ष के साथ जालौन से सेवा नगर गली नंबर आठ पहुंचीं। बेटी का शव देखकर बिलखने लगीं। परिजन सुबह करीब 10 बजे कलक्ट्रेट में डीएम से मिलने पहुंचे।

परिजनों ने डीएम से स्कूल के खिलाफ कार्रवाई, उचित मुआवजा और सभी आरोपियों को जल्द जेल भेजने की मांग की। डीएम ने उन्हें आश्वासन दिया। इसके बाद दोपहर करीब दो बजे प्रियांशी का हिंडन स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया।
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पिता रमन सिंह तोमर ने बताया कि टीचर्स की झूठी शिकायत पर उन्हें हिरासत में लेने पहुंची पुलिस को देखकर उनकी बेटी घबरा गई थी। पुलिस ने उन्हें पीसीआर वैन में बिठा लिया। यह देखकर प्रियांशी भी पीछे से दौड़कर आई और पीसीआर में बैठकर पुलिसकर्मियों से कहने लगी कि ‘अंकल! मेरे पापा ने कुछ नहीं किया है, मैडम झूठ बोल रही हैं।

इसके बाद प्रियांशी को उन्होंने पीसीआर वैन से उतार दिया था। लोगों ने बताया कि कुछ मोहल्ले वालों ने भी उसे ताने दिए थे, इसके बाद प्रियांशी दौड़कर घर आई और उसने मकान की दूसरी मंजिल पर स्थित कमरे में अपने आप को बंद कर गेट के ऊपर लगे जंगले से दुपट्टा बांधकर फंदा लगा लिया था।

बता दें कि सेवानगर में प्रियांशी (16) ने बुधवार को फीस के लिए टीचर्स द्वारा अपमानित करने, पिता को पीटने और पुलिस से पकड़वाने से आहत होकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में डीएसपी स्कूल की कार्यवाहक प्रिंसिपल समेत छह महिला टीचर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिनमें से चार को हिरासत में ले लिया गया था।

जेल गईं चार टीचर्स
सिहानी गेट पुलिस ने बृहस्पतिवार को डीएसपी स्कूल की कार्यवाहक प्रिंसिपल शशि, टीचर कविता, दुर्गेश और अशोक को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से कोर्ट ने उन्हें डासना जेल भेज दिया। फरार दो टीचर्स की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

दो दिन से नहीं जला चूल्हा
प्रियांशी की बहन अनुष्का और कृष्णा ने बताया कि वह आईपीएस अफसर बनना चाहती थी। स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी वह बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती थी। वहीं उन्होंने बताया कि दो दिन से उनके घर में खाना नहीं बना है। पड़ोस के रहने वाले एक व्यक्ति ने उन्हें कल शाम चाय और बिस्किट दिए थे, लेकिन बहन की याद इतनी आ रही है कि न कुछ खाने का मन है न पीने का।

 रद्द होगी स्कूल की मान्यता
 प्रियांशी आत्महत्या मामले से डीएसपी स्कूल की मान्यता खतरे में पड़ गई है। बीएसए ने मामले में जांच बैठा दी है। बृहस्पतिवार को बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल का रिकॉर्ड खंगालने में लगे रहे।

डीएम ने भी इस मामले की सूचना बीएसए से ली है। बीएसए डा. प्रवेश यादव ने स्कूल की फाइल निकलवाई तो मालूम हुआ कि दस वर्ष पूर्व स्कूल को तत्काल निर्धारित मानकों के  आधार पर आठवीं तक की मान्यता दी गई थी।

बीएसए ने बताया कि आरटीई के तहत नए मानकों को पूरा करने के लिए पूर्व में सर्कुलर जारी किया गया था, जिस आधार पर स्कूल की जांच कराई जाएगी। तीन दिन में जांच रिपोर्ट एडी बेसिक को सौंपी जाएगी और उनके आदेशानुसार मान्यता खत्म करने की कार्रवाई होगी।

दूसरी ओर, डीआईओएस राज सिंह यादव ने बताया कि स्कूल की एक और ब्रांच इंद्रगढ़ी में है, जिसे हाई स्कूल की मान्यता यूपी बोर्ड से दी गई है। इस ब्रांच के भी जांच के आदेश उन्होंने जारी किए हैं।

स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों ने बताया कि घूकना स्थित स्कूल में भी इंटर तक की क्लास चलाई जा रही थी। डीआईओएस ने इस मामले की भी जांच करा कर स्कूल के खिलाफ एफआईआर कराने की बात कही है।

 फीस के मामले में बच्चों पर दबाव बनाने पर होगी कार्रवाई
घटना के बाद बीएसए द्वारा आठवीं तक के सभी मान्यता प्राप्त और सहायता प्राप्त विद्यालयों को नोटिस जारी कर सचेत किया है कि वह फीस के मामले में बच्चों पर दबाव नहीं बनाएंगे। ऐसी शिकायत मिलने पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई होगी।

आरटीई के तहत नगर क्षेत्र में मान्यता के मानक
- आठवीं तक के स्कूल के लिए विद्यालय प्रांगण में 10 कमरे अनिवार्य हैं।
- 180 स्क्वायर फीट में स्कूल परिसर हो।
- नगर क्षेत्र में मान्यता के लिए खेल के मैदान की बाध्यता नहीं है।
- 30 से 35 बच्चों पर एक शिक्षक का होना अनिवार्य है।

स्कूल पहुंचे नगर शिक्षा अधिकारी तो लटका मिला ताला
खबर छपने के बाद बृहस्पतिवार सुबह बीएसए केआदेश पर नगर शिक्षा अधिकारी डा. लालमणि मिश्रा स्कूल पर जांच केलिए पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। विद्यालय के बाहर नोटिस बोर्ड पर 1 अगस्त तक की छुट्टी का आदेश चिपका हुआ था।

फीस न देने वाले छात्रों की स्कूल में होती थी बेइज्जती
कुछ छात्रों ने आरोप लगाया है कि प्रिंसिपल और टीचर फीस न देने पर बेइज्जत करते थे। स्कूल में पढ़ रहे दो छात्रों ने बताया कि जो छात्र समय पर फीस नहीं दे पाते थे, टीचर उनके क्लासरूम में पर्ची लेकर जाते और पूरी क्लास के सामने स्टूडेंट को बेइज्जत करते।

फीस न देने वाले स्टूडेंट को खड़ा किया जाता और टीचर बोलते कि समय पर फीस क्यों नहीं जमा की। स्कूल से नाम काट दिया जाएगा। अभिभावक को बुलाकर लाओ।

इस संबंध में एसएचओ सिहानी गेट अवनीश गौतम का कहना है कि पुलिस की पहली प्राथमिकता है कि अगर कोई महिला पुलिस को मारपीट या छेड़छाड़ की सूचना देती है तो पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और छानबीन करे। पुलिस पूछताछ के लिए ही रतन सिंह को लाई थी। पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया था।
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